नई दिल्ली में भारतीय किसान संघ (BKS) द्वारा आयोजित ‘अखिल भारतीय महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन’ में देश की कृषि और सतत खेती में महिला किसानों की निर्णायक भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई ।
सोच बदलने की आवश्यकता
BKS की अखिल भारतीय महिला संयोजिका मंजू दीक्षित ने महिला किसानों के प्रति पारंपारिक धारणा को बदलने का आह्वान किया । उन्होंने रेखांकित किया कि महिला किसान अब तेजी से आधुनिक कृषि तकनीक को अपना रही हैं और परिवार व राष्ट्र की आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं ।
सृजन और पोषण का प्रतीक
कोटा कृषि विश्वविद्यालय की कुलपति विमला डुंकवाल ने कहा कि महिलाओं में सृजन और पालन-पोषण की अद्वितीय क्षमता होती है। उन्होंने महिला किसानों को अन्नपूर्णा और दुर्गा का स्वरूप बताते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों के साथ-साथ ज़िम्मेदारियों को भी प्राथमिकता देती हैं ।

जैविक खेती और ‘गो-कृषि-वाणिज्यम’
संगठन के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्रा ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित और स्वस्थ भारत का निर्माण गो-कृषि-वाणिज्यम और जैविक खेती पर ध्यान दिए बिना संभव नहीं है । उन्होंने सरकार से जहरमुक्त खेती, रोगमुक्त समाज और पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने वाली नीतियां बनाने की अपील की ।
सामाजिक सशक्तिकरण
संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी के अनुसार, स्वावलंबी महिला किसानों को समाज में उचित सम्मान और पहचान मिलने से गांव, परिवार और संपूर्ण समाज मजबूत होगा ।
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