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Panchayat Darpan

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लातेहार : मां उग्रतारा नगर भगवती मंदिर में 16 दिनों की होती है नवरात्रि, सदियों से निभाई जा रही है यह परंपरा

देशभर में 11 अक्टूबर से कलश स्थापना के साथ 9 दिनों तक शारदीय नवरात्र में माता रानी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होगी, लेकिन बात झारखंड के लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड में स्थित पौराणिक और अतिप्राचीन मां उग्रतारा नगर मंदिर में 9 दिन नहीं बल्कि 16 दिनों तक नवरात्र मनाने की परंपरा है जो सैकडों सालों से आज भी निभाई जा रही है.लातेहार जिला में स्थित मां उग्रतारा नगर मंदिर में, जितिया पर्व के ठीक दूसरे दिन कलश स्थापित कर मां अष्टादशभुजा की पूजा के साथ ही 16 दिवसीय नवरात्र की शुरुआत हो गई है.

 

निभाई जाती है पुरानी परंपरा

आधुनिकता के इस दौर में जहां, धार्मिक अनुष्ठान के लिए भी एक तरफ डिजिटल संसाधन और एआई का उपयोग कर पूजा को संपन्न करने का प्रचलन तेजी से बड़ा है वहीं दूसरी तरफ मां उग्रतारा नगर भगवती के मंदिर में आज भी 500 सालों से भी ज्यादा पौराणिक, हस्तलिखित कैथी लिपि की पोथी के आधार पर ही आज भी पूजा अनुष्ठान पूरा किया जा रहा है. लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड में स्थित मां उग्रतारा नगर भगवती मंदिर के सेवायत पंडित गोविंद बल्लभ मिश्र और चंदवा प्रखंड के उप प्रमुख अश्विनी मिश्रा ने बतलाया कि सैकडों सालों से चली आ रही पूजा परंपरा का आज भी हस्तलिखित कैथी लिपि की पोथी के आधार पर ही संपन्न कराया जा रहा है, 4 अक्टूबर सुबह मंदिर में प्रथम कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो गयी है.

 

16 दिनों की होती है नवरात्रि

यह मंदिर देश का एक मात्र मंदिर है जहां 16 दिनों की नवरात्रि होती है, वही इस मंदिर को माता रानी को फल -मिठाई के बजाय, साल के 365 दिन दाल -चावल और सब्जी का भोग लगता है , और सबसे आश्चर्यजनक और बेहद एक अनोखा यहां भोग अनुष्ठान होता है, इस मंदिर में स्थापित माता रानी भोग ग्रहण करने के लिए प्रतिदिन रसोई घर में जाती है, दरअसल परंपरा के तहत मां उग्रतारा नगर भगवती मंदिर के पुजारी प्रतिदिन माता की प्रतिमा को उठाकर रसोई घर में पहुंचाकर भोग लगाते हैं. माता की प्रतिमा को भोग अर्पित करने के उपरांत,माता की प्रतिमा को वापस मंदिर में स्थापित किया जाता है.

 

चंदवा टोरी रोड पर है मंदिर

लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर चंदवा-टोरी रोड पर स्थित मंदागिरि पहाड़ पर स्थित सैकडों साल प्राचीन मां उग्रतारा नगर भगवती की मंदिर से जुड़ी कई कहानियां इसे बेहद रोचक और खास बनाती हैं. यहां विजयादशमी के दिन विशेष अनुष्ठान के तहत माता रानी को पान का पत्ता चढ़ाया जाता है, और जब तक आसन से स्वयं पान का पत्ता गिर नहीं जाता तब तक माता का विसर्जन नहीं होता है, आसन से माता को अर्पित पान का पत्ता गिरने को यह, संदेश माना जाता है की मां ने अपनी अनुमति दी है उन्हें विदाई करने की, जब तक पान का पत्ता नहीं गिरता है तब तक धार्मिक अनुष्ठान और आरती निरंतर जारी रहती है.

 

टोरी स्टेट के शासक ने बनाया था मंदिर

यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और सदियों पुरानी परंपराओं का जीवंत केंद्र है। मान्यता है कि टोरी स्टेट के शासक ने मंदिर का निर्माण कराया था। वहीं मंदिर के सेवायतों के अनुसार, रानी अहिल्याबाई होल्कर भी मां की महिमा सुनकर यहां पहुंची थीं और पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के जीर्णोद्धार से उनका नाम जुड़ा है। मंदिर से जुड़ी एक अनोखी लोकमान्यता के अनुसार श्रद्धालु मां के दरबार में फूल चढ़ाकर अपनी मनोकामना रखते हैं। यदि चढ़ाया गया फूल माता के चबूतरे से नीचे गिर जाए, तो इसे मां की स्वीकृति का संकेत माना जाता है.मिश्री और सूखा नारियल यहाँ का प्रमुख प्रसाद माना जाता है.यहां झारखण्ड के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, ओड़िसा से भी श्रद्धालु माता का दर्शन -पूजन करने सालों भर आते रहते हैं.