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Panchayat Darpan

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उत्तराखंड में होगी रूद्राक्ष की खेती, पलायन रोकने में होगी मददगार, सरकार ने किया खाका तैयार

‘देवभूमि’ के रूप में पहचाने जाने वाले उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों से दशकों से हो रहे पलायन की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने रुद्राक्ष की खेती को एक नए आर्थिक विकल्प के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है. राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग को रुद्राक्ष की खेती, फार्म प्रबंधन, प्रसंस्करण, विपणन और मिट्टी की उपयुक्तता पर एक स्पष्ट नीतिगत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं.

पलायन और कृषि चुनौतियों का समाधान

  • उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में कृषि से कम आय, जंगली जानवरों द्वारा फसलों का नुकसान और भूमि के छोटे-छोटे टुकड़ों के कारण कई गांव ‘भूतहा गांव’ (Ghost Villages) में तब्दील हो चुके हैं. वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक रमेश सिंह पाल के अनुसार, रुद्राक्ष की खेती इन समस्याओं का एक प्रभावी समाधान बन सकती है
  • रुद्राक्ष के पौधों को जंगली जानवर नहीं खाते.
  • एक बार स्थापित होने के बाद इसके रखरखाव में बहुत कम खर्च आता है.
  • घरेलू और निर्यात बाजार में इसकी भारी मांग है.

नेपाल अध्ययन दल की रिपोर्ट और भौगोलिक अनुकूलता

टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय के अनुरोध पर कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का एक चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल नेपाल के भोजपुर जिले के दौरे पर गया था. इस दल द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपी गई 197 पन्नों की तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के 500 से 1,800 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्र रुद्राक्ष की खेती के लिए बेहद उपयुक्त पाए गए हैं

  • नेपाल का रुद्राक्ष बेल्ट: 600-2,000 मीटर ऊंचाई, 25-30°C औसत तापमान, 1,500-2,500 मिमी वर्षा
  • उत्तराखंड का प्रस्तावित क्षेत्र: 500-1,800 मीटर ऊंचाई, 22-35°C औसत तापमान, 1,000-2,200 मिमी वर्षा

 

अंतरराष्ट्रीय बाजार और चीन की भारी मांग

रिपोर्ट के अनुसार, रुद्राक्ष का सबसे बड़ा वैश्विक आयातक चीन है, जो कुल दर्ज निर्यात का 63.7% हिस्सा खरीदता है. चीन का अनुमानित आयात (2025) $100,800,000 (लगभग 10 करोड़ डॉलर) के करीब है. भारत का आयात 20,140,000, जिसका 95% से अधिक हिस्सा नेपाल और इंडोनेशिया से आता है.

किसानों के लिए प्रोत्साहन और प्रसंस्करण योजना

पेड़ों के फल देने से पहले के शुरुआती वर्षों में गड्ढे खोदने, पौधरोपण और बाड़ लगाने के श्रम खर्च के लिए मनरेगा (MGNREGA) का उपयोग करने का प्रस्ताव है. उद्यान विभाग मुफ्त या सब्सिडी वाले दरों पर पौधे उपलब्ध कराएगा. महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को रुद्राक्ष की सफाई, ग्रेडिंग और ऑइलिंग तथा युवाओं को माला बनाने, चांदी की कैपिंग और पैकेजिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे कच्चे दानों को बेचने की तुलना में अधिक कमाई होगी

वर्ष 2047 तक के बड़े लक्ष्य

राज्य सरकार ने रुद्राक्ष की खेती को लेकर दीर्घकालिक लक्ष्य तय किए हैं. सरकार के लक्ष्य के अनुसार 10,000 हेक्टेयर भूमि पर रुद्राक्ष की खेती की जाएगी. इस दौरान 1 करोड़ (10 मिलियन) रुद्राक्ष के पौधे लगाने की योजना है. योजना के तहत 50,000 से 70,000 किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में 1.5 लाख तक नए रोजगार सृजित होंगे.