ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवा अब पारंपरिक नौकरी की बजाय स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों को अपनाने लगे हैं। डेयरी, मधुमक्खी पालन, खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई केंद्र और डिजिटल सेवा केंद्र जैसे कार्यों से उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है। सरकारी योजनाओं, कौशल प्रशिक्षण और बैंक ऋण की सहायता से कई युवाओं ने अपने उद्यम की शुरुआत की है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाज़ार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराई जाए तो ग्रामीण उद्यमिता देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से मिली नई पहचान, छोटे व्यवसायों की ओर बढ़ा रुझान
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