पलामू। चैनपुर प्रखंड के बंदुआ गांव में ग्रामीणों ने नशाखोरी और अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ सामूहिक पहल की। रविवार को बंदुआ राम मंदिर में हुई बैठक में पंचायत के विभिन्न गांवों और टोलों से आए लोगों ने गांजा, दारू और हेरोइन समेत नशीले पदार्थों के सेवन और बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने का सर्वसम्मति से फैसला लिया। ग्रामीणों ने कहा कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति का सबसे ज्यादा असर युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है।
युवाओं के भविष्य को लेकर जताई चिंता
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बैठक की अध्यक्षता बंदुआ मुखिया दीनानाथ मांझी ने की। इसमें पंचायत के अलग-अलग गांवों से पहुंचे लोगों ने नशे के बढ़ते चलन पर अपनी बात रखी। ग्रामीणों ने कहा कि गांजा और हेरोइन जैसे नशीले पदार्थों की लत में फंसकर कई युवा अपना भविष्य खराब कर रहे हैं। चर्चा के बाद तय किया गया कि बंदुआ पंचायत के सभी गांवों में नशीले पदार्थों का सेवन और कारोबार स्वीकार नहीं किया जाएगा।
नियम तोड़ने वालों पर रहेगी नजर
बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि गांव में नशे का सेवन या कारोबार करने वालों के खिलाफ सामाजिक स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि ग्रामीणों की इस पहल के साथ स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी अहम रहेगी, खासकर अवैध मादक पदार्थों की बिक्री और तस्करी के मामलों में कानूनी कार्रवाई के लिए। अभियान का उद्देश्य केवल प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि गांव के युवाओं को नशे से दूर रखना भी बताया गया।

गांव-गांव निगरानी की तैयारी
जिला परिषद सदस्य फैजल अहमद ने ग्रामीणों के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि केवल नियम बनाने से नशा मुक्ति संभव नहीं होगी, बल्कि लगातार निगरानी भी जरूरी है। उन्होंने नशा मुक्त अभियान के लिए विशेष निगरानी टीम गठित करने की घोषणा की। टीम गांव-गांव जाकर नशे के सेवन और बिक्री से जुड़ी जानकारी जुटाएगी तथा जरूरत पड़ने पर इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन और सामाजिक कमेटी को देगी।
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बैठक में मुस्तकीम अंसारी, शशि भूषण पांडेय, ऋतिक पाण्डेय, जहीर आलम, उदय यादव, रामनाथ पाण्डेय, दीपक मिश्रा, चंद्रशेखर पाण्डेय समेत चैनपुर थाना पुलिस और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। बंदुआ की यह पहल तब ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है, जब ग्रामीण स्तर पर नशे की रोकथाम के लिए समुदाय, परिवार और प्रशासन, तीनों के बीच लगातार सहयोग की जरूरत होती है।
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