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Panchayat Darpan

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बिहार के पंचायतों की बढ़ेगी कमाई, गांवों में बिल्डिंग और रियल एस्टेट परियोजनाओं पर भी होगा नियंत्रण

बिहार के ग्रामीण इलाकों में तेजी से बढ़ रहे भवन निर्माण और रियल एस्टेट परियोजनाओं को अब नियमों के दायरे में लाने की तैयारी है। बिहार विधानसभा में 22 जुलाई 2026 को पेश बिहार पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2026 में पंचायतों के संसाधन बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भवन और संपत्ति विकास परियोजनाओं के नियमन की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। विधेयक में ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र में लगाए जाने वाले विज्ञापनों पर शुल्क वसूलने तथा भविष्य में पंचायत के संसाधन बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित अन्य शुल्क या दर लगाने का अधिकार देने का प्रावधान किया गया है।

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पंचायतों की आमदनी बढ़ाने का रास्ता

बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 27 में पंचायतों के अपने संसाधन यानी Own Source Revenue (OSR) बढ़ाने के लिए अलग-अलग कर और शुल्क लगाने का प्रावधान है। विधेयक में इसमें विज्ञापन शुल्क को स्पष्ट रूप से जोड़ने का प्रस्ताव है। सरकार के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में कई व्यक्ति, एजेंसियां और संस्थान पंचायत की अनुमति या शुल्क दिए बिना अपने विज्ञापन प्रदर्शित कर रहे हैं। जिस तरह नगर निकाय अपने क्षेत्र में विज्ञापन पर शुल्क वसूलते हैं, उसी तरह ग्राम पंचायतों को भी अपने क्षेत्र में लगाए जाने वाले विज्ञापनों पर शुल्क लेने की व्यवस्था करने का प्रस्ताव है।

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गांवों में अपार्टमेंट और बड़े प्रोजेक्ट अब निगरानी के दायरे में

विधेयक का दूसरा और ज्यादा महत्वपूर्ण हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रियल एस्टेट और बड़े भवन निर्माण को लेकर है। नगर निकाय की सीमा से बाहर और बिहार शहरी आयोजना एवं विकास अधिनियम, 2012 के दायरे में नहीं आने वाले इलाकों में रियल एस्टेट विकास परियोजनाओं, बिल्डिंग, अपार्टमेंट, ग्रुप हाउसिंग, व्यावसायिक भवन और ले-आउट योजनाओं के नियंत्रण, विनियमन और अनुश्रवण के लिए प्राधिकरण गठित करने का प्रस्ताव है। इसका मतलब यह है कि शहर से सटे ग्रामीण इलाकों में तेजी से विकसित हो रही ऐसी परियोजनाओं पर भी एक निर्धारित नियामक व्यवस्था लागू की जा सकेगी।

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मसलन, किसी शहर के बाहरी इलाके में खेतों के आसपास तेजी से अपार्टमेंट या बड़ी कॉलोनी विकसित होने लगे और वहां सड़क, नाली, जल निकासी या अन्य बुनियादी सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो, तो ऐसी परियोजनाओं की स्वीकृति केवल भवन खड़ा करने तक सीमित नहीं रहेगी। विधेयक में प्रस्तावित प्राधिकरण को आधारभूत संरचना और पर्यावरण के विकास की योजना बनाने तथा पूरे क्षेत्र का संतुलित विकास सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी देने की बात कही गई है।

सड़क-पानी-नाली के बिना नहीं हो बड़े निर्माण?

विधेयक के पीछे की सबसे बड़ी चिंता ग्रामीण इलाकों में अनियंत्रित और मानकविहीन निर्माण बताई गई है। दस्तावेज में कहा गया है कि शहरों का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों की ओर होने और रियल एस्टेट परियोजनाओं के तेजी से आकार लेने के कारण कई जगह बिना निर्धारित मानकों और सुरक्षा प्रावधानों के बड़े भवन बनाए जा रहे हैं। इसलिए नई परियोजनाओं को इस तरह मंजूरी देने की जरूरत बताई गई है कि ग्रामीण आबादी को चौड़ी सड़क, पार्क, जल निकासी, सीवरेज, सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं आसानी से मिल सकें।

विधेयक में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित प्राधिकरण के आदेशों के खिलाफ अपील और सुनवाई के लिए राज्य सरकार ग्रामीण भवन न्यायाधिकरण गठित कर सकती है। इस तरह पहली बार ग्रामीण इलाकों में बड़े निर्माण और भवन परियोजनाओं के लिए एक अलग नियामक ढांचे की दिशा में कदम बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।

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पंचायतों के लिए कमाई, गांवों के लिए नई जिम्मेदारी

इस बदलाव का एक पहलू पंचायतों की आर्थिक क्षमता से जुड़ा है, तो दूसरा ग्रामीण नियोजन से। विज्ञापन शुल्क जैसे नए स्रोत पंचायतों के Own Source Revenue को बढ़ा सकते हैं। लेकिन इसके साथ पंचायतों और संबंधित प्राधिकरणों पर यह जिम्मेदारी भी बढ़ेगी कि शुल्क और निर्माण की अनुमति केवल राजस्व जुटाने का माध्यम न बनें, बल्कि सड़क, जल निकासी, पर्यावरण और नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखकर विकास हो।

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पंचायत दर्पण की टीम यह मानती है कि इस विधेयक का असली महत्व गांव और शहर के बीच तेजी से मिटती सीमा में है। आज कई पंचायत क्षेत्र शहरों के विस्तार के कारण जमीन और रियल एस्टेट बाजार के केंद्र बन रहे हैं। यदि इन इलाकों में विकास बिना नियोजन के होता रहा तो कुछ वर्षों बाद वही समस्या पैदा हो सकती है, जिसका सामना शहरों को अनियोजित विस्तार के कारण करना पड़ता है। इसलिए ग्रामीण भवन नियमन का विचार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रस्तावित व्यवस्था कितनी पारदर्शी रहती है, छोटे भू-स्वामियों पर अनावश्यक बोझ न पड़े और नियमों का इस्तेमाल भ्रष्टाचार या मनमानी के लिए न हो।

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