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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में कृषि और ग्रामीण विकास की नई दिशा पर होगा मंथन

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान 18 अगस्त को नई दिल्ली के पूसा परिसर में दोनों मंत्रालयों के अधिकारियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से स्वतंत्रता दिवस संबोधन में बताए गए ‘सप्त धारा ऑफ शक्ति’ के तहत शपथ दिलाएंगे। कार्यक्रम में कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े विभागों की कार्ययोजना पर चर्चा होगी। इसमें प्रगतिशील किसान, लखपति दीदियां, कृषि निर्यातक और फूड प्रोसेसर भी शामिल होंगे। उद्देश्य विकसित भारत 2047 के लिए कृषि और ग्रामीण विकास की योजनाओं को स्पष्ट कार्ययोजना में बदलना है।

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कृषि से खाद्य प्रसंस्करण और वैश्विक बाजार तक फोकस

प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में कृषि और खाद्य उत्पादन को मजबूत करने, खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने और किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने को प्राथमिकताओं में रखा गया था। कार्यक्रम में इन्हीं बिंदुओं को आगे बढ़ाने के लिए विभागीय रोडमैप की समीक्षा की जाएगी। वैश्विक परिस्थितियों के बीच किसानों को सब्सिडी पर उर्वरक उपलब्ध कराने और कृषि व समुद्री उत्पादों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार तलाशने पर भी जोर रहेगा।

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3 करोड़ से 6 करोड़ लखपति दीदी का लक्ष्य

बैठक का एक बड़ा मुद्दा लखपति दीदी कार्यक्रम का विस्तार होगा। सरकार के अनुसार अब तक 3 करोड़ ग्रामीण महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं और प्रधानमंत्री ने यह संख्या बढ़ाकर 6 करोड़ करने का लक्ष्य रखा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को कौशल विकास और वित्तीय सहायता के जरिए आय बढ़ाने में मदद दी जा रही है। उदाहरण के तौर पर गांव की कोई महिला समूह के माध्यम से खाद्य उत्पाद, हस्तशिल्प या अन्य ग्रामीण उत्पाद तैयार करती है तो बेहतर बाजार मिलने पर उसका कारोबार स्थानीय बिक्री से आगे बढ़ सकता है।

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गांव की महिला से बाजार तक पहुंचेगा उत्पाद

ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने के लिए She-Marts जैसी पहल को भी आगे बढ़ाने की योजना है। योग, आयुर्वेद, हस्तशिल्प और अन्य ग्रामीण उत्पादों की ब्रांडिंग कर उन्हें देश और विदेश के बाजार तक पहुंचाने पर जोर रहेगा। चौहान के अनुसार विभागीय योजनाओं को केवल कागज पर रखने के बजाय उनके क्रियान्वयन में तेजी लाने की जरूरत है। किसान और ग्रामीण महिलाएं इस पूरी रणनीति के केंद्र में रहेंगी, ताकि कृषि उत्पादन के साथ आय और रोजगार के नए अवसर भी बढ़ें।

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