Skip to main content

Panchayat Darpan

|

झारखंड के 13 जिलों के पानी में फ्लोराइड, पलामू की स्थिति सबसे गंभीर, देश में 10वें स्थान पर राज्य

झारखंड में भूजल में फ्लोराइड की बढ़ती मात्रा चिंता का कारण बन रही है। भारत सरकार के नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ फ्लोरोसिस (एनपीपीसीएफ) की जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही रिपोर्ट के अनुसार राज्य के सात जिलों के 283 गांवों में पानी में फ्लोराइड की अधिकता पाई गई है। सबसे अधिक प्रभावित हजारीबाग के 89 गांव हैं। इसके बाद गोड्डा के 81, गढ़वा के 35, साहिबगंज के 34, रामगढ़ के 28, गिरिडीह के नौ और पलामू के सात गांव शामिल हैं। पानी में फ्लोराइड की अधिकता का असर अब स्क्रीनिंग में बच्चों के दांतों पर भी सामने आ रहा है। रामगढ़ में 2,826 बच्चों की जांच में 412 संदिग्ध मामले मिले, जिनमें 221 की पुष्टि हुई। साहिबगंज में 54,214 बच्चों की स्क्रीनिंग में 1,369 संदिग्ध मामले सामने आए। गोड्डा में 410 बच्चों की जांच में 108 संदिग्ध और 14 पुष्ट मामले मिले।

13 जिलों में फ्लोराइड की समस्या, पलामू की स्थिति सबसे गंभीर

रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 24 जिलों में से 13 जिले एनपीपीसीएफ के तहत फ्लोराइड प्रभावित माने गए हैं। इनमें चतरा, धनबाद, गढ़वा, गिरिडीह, गोड्डा, हजारीबाग, जामताड़ा, पाकुड़, पलामू, रामगढ़, रांची, साहिबगंज और सिमडेगा शामिल हैं। ताजा जल जांच में पलामू की स्थिति सबसे गंभीर सामने आई है। यहां जांच किए गए 137 पानी के नमूनों में 89 यानी करीब 65% में फ्लोराइड 1 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक पाया गया। गढ़वा में 132 में 44, साहिबगंज में 750 में 153 और हजारीबाग में 195 में 20 नमूने इस सीमा से ऊपर मिले। गोड्डा में 23 में दो नमूनों में फ्लोराइड अधिक पाया गया। वहीं, रामगढ़ में 20 जलस्रोतों को अनफिट घोषित किया गया है और 15 सुरक्षित जलस्रोत उपलब्ध कराने की बात रिपोर्ट में दर्ज है।

 

देश में झारखंड 10वें स्थान पर, 138 में 9 नमूने सीमा से ऊपर

केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूडी) के प्री-मानसून 2024 के आंकड़ों के मुताबिक झारखंड में जांच किए गए 138 नमूनों में 9 यानी 6.5% नमूनों में फ्लोराइड 1.5 एमजी/लीटर की अधिकतम अनुमेय सीमा से ज्यादा मिला। राज्यों की तुलना में झारखंड इस मामले में 10वें स्थान पर है। झारखंड से ऊपर राजस्थान 33%, गुजरात 31.3%, हरियाणा 24%, दिल्ली 23.7%, तेलंगाना 19.7%, बिहार 18.1%, कर्नाटक 16.7%, पंजाब 14.8% और आंध्र प्रदेश 10.2% हैं। देश का औसत 7.6% रहा। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के अनुसार पेयजल में फ्लोराइड की वांछनीय सीमा 1.0 एमजी/लीटर और अधिकतम अनुमेय सीमा 1.5 एमजी/लीटर है। इससे अधिक मात्रा वाले पानी का लगातार सेवन स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता।

दांतों के बाद हड्डियों और जोड़ों पर भी पड़ सकता है असर

फ्लोराइड की अधिक मात्रा का शुरुआती असर दांतों पर दिखाई दे सकता है। रामगढ़ में 934 लोगों की जांच में 76 संदिग्ध डेंटल फ्लोरोसिस के मामले मिले, जिनमें चार की पुष्टि हुई। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक अधिक फ्लोराइड वाला पानी पीने से दांतों पर पीले या भूरे-काले दाग, दांतों की संरचना में बदलाव और डेंटल फ्लोरोसिस की समस्या हो सकती है। अधिक गंभीर स्थिति में हड्डियों और जोड़ों में दर्द व अकड़न जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना, प्रभावित जलस्रोतों की नियमित जांच और बच्चों की स्क्रीनिंग जरूरी है। सदर अस्पताल रांची के मेडिसिन विभाग के डॉ. जय प्रकाश के अनुसार, लंबे समय तक अधिक फ्लोराइडयुक्त पानी का सेवन हड्डियों और जोड़ों को भी प्रभावित कर सकता है।