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गेहूं के बढ़ते दाम और अल नीनो की आहट: भारत में रबी फसलों पर मंडराया संकट

देश में अन नीनो का असर साफ दिख रहा है. खरीफ फसलों खास कर धान की बुवाई प्रभावित हुई है, इसके कारण उत्पादन में तमी आ सकती है. भारत में खरीफ के बाद रबी फसल का सीजन आता है और गेहूं रबी की प्रमुख फसल है. लेकिन सीजन की शुरुआत होने से पहले ही गेहूं की कीमतों में उछाल देश जा रहा है. देश की कई प्रमुख मंडियों में पिछले एक महीने के भीतर गेहूं के भाव में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है. मंडियों में गेहूं के दाम करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़कर 2,700 रुपये से 2,850 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गए हैं. थोक व खुदरा बाजार में आटा भी 34 से 35 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है. इस तेजी के पीछे चार प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं.

गेहूं में तेजी के कारण

  • अगस्त महीने में में सरकार द्वारा गेहूं व आटा निर्यात से प्रतिबंध हटाना
  • आगामी रबी सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ने की उम्मीद में स्टॉक होल्ड करना
  • सितंबर में मंडियों में आवक कम होना
  • काला सागर क्षेत्र में जारी वैश्विक तनाव

अल नीनो की चुनौती

प्रशांत महासागर से उठती अल नीनो की चुनौती कीमतों में तात्कालिक उछाल के साथ-साथ आने वाली रबी फसलों के लिए सबसे बड़ा जोखिम प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो (El Niño) स्थिति से बन रहा है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की चेतावनी के अनुसार, अल नीनो मजबूत होकर फरवरी 2027 तक बना रह सकता है. इसके अलावा, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून में दीर्घकालिक औसत (LPA) की 90% बारिश (सामान्य से कम) का अनुमान व्यक्त किया है.

 

टर्मिनल हीट स्ट्रेस

रबी फसल और ‘टर्मिनल हीट स्ट्रेस’ का खतरा भारत में गेहूं, सरसों और चने जैसी रबी फसलों की बुवाई अक्टूबर-नवंबर में होती है, जबकि फसल का सबसे संवेदनशील दौर फरवरी-मार्च में दाना भरने का समय होता है. अल नीनो के कारण यदि सर्दियों में तापमान सामान्य से अधिक रहता है, तो गेहूं की फसल में ‘टर्मिनल हीट स्ट्रेस’ (Terminal Heat Stress) का जोखिम बढ़ जाता है. इससे दाने का वजन घट सकता है और पैदावार प्रभावित हो सकती है.

पर्याप्त है स्टॉक

सरकारी कदम और बफर स्टॉक की स्थिति हालांकि, देश में वर्ष 2025-26 के दौरान 120.65 मिलियन टन रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन का अनुमान रहा है. भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास खाद्य कल्याण योजनाओं के लिए आवश्यक मात्रा से अधिक स्टॉक उपलब्ध है. सरकार ने जमाखोरी रोकने तथा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं और प्रसंस्करणकर्ताओं पर स्टॉक सीमा (Stock Limits) भी दोबारा लागू कर रखी है.