भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र (Fisheries Sector) में तेजी लाने के लिए शुरू की गई नीली क्रांति (Blue Revolutoin) का असर दिखना शुरू कर दिया और देश ने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है. नीली क्रांति को रफ्तार देने में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) काफी कारगर साबित हो रही है. इस योजना के सफल संचालन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन गया है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात 73,890.46 करोड़ रुपये के ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है.
6 वर्षों में कैसे बदली तस्वीर
मछली निर्यात के क्षेत्र में देश को कई प्रकार की वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, इसके बावजूद देश के किसानों की मेहनत के बदौलत आज देश ने इस क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. चुनौतियों के बावजूद पिछले 11 वर्षों में लगभग 7% की औसत वार्षिक वृद्धि दर्ज की है.
निर्यात के आंकड़े
- 2019-20: 46,662.85 करोड़ रुपये
- 2020-21: 43,720.98 करोड़ रुपये
- 2021-22: 57,586.48 करोड़ रुपये
- 2022-23: 63,969.14 करोड़ रुपये
- 2023-24: 60,523.89 करोड़ रुपये
- 2024-25: 62,408 करोड़ रुपये
- 2025-26: 73,890.46 करोड़ रुपये
देश में कुल मछली उत्पादन
भारत विश्व के कुल मछली उत्पादन का लगभग 8% से 9% हिस्सा योगदान करता है. खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अंतर्देशीय जल (Inland Fisheries) से मछली पकड़ने में दुनिया में प्रथम स्थान पर है. वर्ष 2019-20 में कुल उत्पादन 141.64 लाख टन था, जिसमें अंतर्देशीय उत्पादन 104.37 लाख टन था. 2024-25 में कुल उत्पादन 197.75 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. पिछले छह सालों में देश के मछली उत्पादन में औसतन 7% प्रतिवर्ष की तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है

भारतीय मछली के प्रमुख आयातक देश और मात्रा
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 130 से अधिक देशों को समुद्री खाद्य उत्पादों का निर्यात किया. मूल्य के मामले में भारत का सबसे बड़ा मछली खरीदार अमेरिका है. अमेरिका ने 2,79,193 मीट्रिक टन सीफूड का आयात किया, जिसकी कीमत 20,263.27 करोड़ रुपये रही. अमेरिका के कुल आयात मूल्य में फ्रोजन झींगे (Frozen Shrimp) की हिस्सेदारी 93.55% रही. जबकि मात्रा के हिसाब से चीन सबसे बड़ा देश है. चीन ने 4,90,369 मीट्रिक टन समुद्री खाद्य आयात किया, जिसकी कीमत 1.61 अरब डॉलर रही. मूल्य में तीसरा बड़ा बाजार यूरोपीय संघ है जिसने 2,97,518 मीट्रिक टन ( 1.59 अरब डॉलर) का आयात किया. वही दक्षिण पूर्व एशिया ने 4,51,756 मीट्रिक टन (1.34 अरब डॉलर) का आयात किया. जापान ने 1,05,228 मीट्रिक टन (452.91 मिलियन डॉलर) का आयात किया. मध्य पूर्व के देशों ने 76,743 मीट्रिक टन (283 मिलियन डॉलर) का आयात किया भारत के निर्यात बास्केट में फ्रोजन झींगा (Frozen Shrimp) सबसे प्रमुख उत्पाद बना हुआ है, जिसने 2025-26 में अकेले 49,037.93 करोड़ रुपये की कमाई कराई. यह कुल डॉलर कमाई का 66.52% और कुल निर्यात मात्रा का 40.19% है
PMMSY का योगदान
सितंबर 2020 में शुरू की गई प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) ने सितंबर 2026 में अपने 6 वर्ष पूरे कर लिए हैं. योजना के तहत अब तक 20,750 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. 2020-21 से 2025-26 के दौरान 21,394.88 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिसमें 9,510.89 करोड़ रुपये का केंद्रीय हिस्सा शामिल है. 2026-27 के बजट में सरकार ने बजट अनुमान में योजना के लिए 2,500 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड आवंटन किया. कोल्ड चेन और मार्केटिंग के लिए ₹2,797 करोड़ स्वीकृत किए गए. जबकि हार्बर और फिशिंग पोर्ट्स के लिए 3,741.89 करोड़ रुपये दिए गए. 2,195 ‘फिश फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशंस’ की स्थापना के लिए 544.86 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई. ‘प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना’ के तहत ₹6,000 करोड़ का अनुमानित परिव्यय रखा गया..
उत्पादन वृद्धि, रोजगार और तकनीक में PMMSY की भूमिका
PMMSY ने केवल उत्पादन ही नहीं बढ़ाया, बल्कि पूरे वैल्यू-चेन का आधुनिकीकरण किया है. योजना के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में लगभग 58 लाख लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं. राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) पर सितंबर 2026 तक 37.23 लाख से अधिक पंजीकरण दर्ज हुए, जिससे मछुआरों को संस्थागत क्रेडिट, बीमा और ट्रेसिबिलिटी की सुविधा मिली. देश में 12,081 रीसर्क्युलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), 4,205 बायोफ्लोक (Biofloc) यूनिट्स, 52,058 रिजर्वॉयर केज और 12 इंटीग्रेटेड एक्वापार्क (लागत ₹713.80 करोड़) स्वीकृत किए गए हैं. तटीय मछुआरा समुदायों को मजबूत करने के लिए 100 तटीय गांवों की पहचान की गई है, जिनमें से प्रत्येक गांव के लिए ₹200 लाख की शत-प्रतिशत सरकारी सहायता निर्धारित की गई है.