भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 की अनिश्चित चाल और प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण देश के बड़े भूभाग में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं. इससे खरीफ फसलों की पैदावार और आगामी रबी सीजन की तैयारी दोनों पर गंभीर चिंताएं खड़ी हो गई हैं
53% भूभाग पर सूखे का साया
देश में सितंबर 2026 तक देश भर में औसतन 15% कम बारिश दर्ज की गई है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पूरे मानसून सीजन में सामान्य से कम (LPA का 90%) बारिश का अनुमान जताया था. ‘इंडिया ड्राउट मॉनिटर’ और IIT गांधीनगर के अध्ययन के अनुसार, देश का 53.2% भौगोलिक क्षेत्र किसी न किसी स्तर के सूखे से जूझ रहा है. इसमें से 33.4% हिस्सा मध्यम से गंभीर सूखे की श्रेणी में है, 15.4% गंभीर सूखे में और 3.8% क्षेत्र अत्यधिक सूखे की चपेट में है. महाराष्ट्र का 85.2% इलाका सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है. इसके अलावा छत्तीसगढ़ (11.91%), मध्य प्रदेश (5.22%) और उत्तर प्रदेश (4.92%) के कई क्षेत्र भी गंभीर सूखे से प्रभावित हैं. पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत (-27%), दक्षिण भारत (-21% से -22%) और उत्तर-पश्चिम भारत (-10% से -12%) में बारिश की भारी कमी रही. राज्य स्तर पर बिहार (-42%) और आंध्र प्रदेश (-40%) में गहरा सूखा है, जबकि ओडिशा में 27% अधिक बारिश दर्ज की गई है.
315 जिलों के लिए सरकारी आकस्मिक योजना
कृषि मंत्रालय ने कम बारिश और सिंचाई संकट से निपटने के लिए 315 संवेदनशील जिलों की पहचान कर जिला-स्तरीय आकस्मिक योजनाएं लागू की हैं. 111 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों का चयन किया गया है, जहाँ सिंचाई कवरेज 25% से भी कम है. 76 मध्यम प्राथमिकता वाले जिलों का चयन किया गया है, जहाँ सिंचाई कवरेज 25% से 50% के बीच है. सरकार जल संरक्षण, वैकल्पिक फसलों की बुआई, और कम पानी वाली फसलों के विविधीकरण (Crop Diversification) पर जोर दे रही है.

खरीफ बुआई और फसलों की स्थिति
जुलाई-अगस्त की बारिश से खरीफ बुआई में सुधार हुआ और यह पिछले साल के मुकाबले केवल 1.5% पीछे (105.7 मिलियन हेक्टेयर) रही. धान (चावल) के क्षेत्रफल में 3.2%, मोटे अनाज में 1.9% और गन्ने में 0.7% की कमी आई है, जबकि दालों के रकबे में 1.3% की बढ़त देखी गई है. बारिश पर निर्भर (Rain-fed) क्षेत्रों में नमी की कमी के कारण धान, सोयाबीन, अरहर और उड़द जैसी फसलों की पैदावार घटने की संभावना है
जल संसाधन और पशुधन संकट
केंद्रीय जल आयोग (CWC) के 176 प्रमुख जलाशयों में जल स्तर क्षमता का 64% ही बचा है, जो पिछले वर्ष (78%) से काफी कम है. उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के जलाशयों में पानी का संकट अधिक गहरा है. कच्छ में मानसून की बारिश में 60% की भारी कमी हुई है. वहाँ 21 लाख मवेशियों के सामने चारा और पानी का संकट खड़ा हो गया है. दूध उत्पादन में रोजाना 1 लाख लीटर से अधिक की गिरावट आई है और मालधारी (पशुपालक) परिवारों का पलायन शुरू हो चुका है. पानी की कमी और कम बाजार भाव के चलते पिछले रबी सीजन में राजस्थान में सरसों की बुआई में 5 लाख एकड़ (5 लाख हेक्टेयर से अधिक) की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी.
आर्थिक विकास और महंगाई पर प्रभाव
खाद्य महंगाई (Food Inflation): अल नीनो प्रभाव के कारण खाद्य महंगाई में 30 से 50 बेसिस पॉइंट (0.3%-0.5%) की बढ़ोतरी हो सकती है. कृषि जीडीपी वृद्धि दर में 2% से अधिक की गिरावट आ सकती है, जिससे देश की कुल जीडीपी वृद्धि दर में 40 बेसिस पॉइंट (0.40%) की कमी आ सकती है.
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