देश में एल नीनो (El Nino) के खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने रबी फसल के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। देश के जलाशयों में पानी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस वर्ष 2026-27 के लिए 177.72 मिलियन टन (MT) खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है । जबकि वर्ष 2026-27 के लिए कुल खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य 373.93 मिलियन टन तय किया गया है, जो वर्ष 2025-26 के 376.56 मिलियन टन के रिकॉर्ड उत्पादन से 2.63 मिलियन टन कम है ।
मानसूनी वर्षा की स्थिति
हालांकि इस बीच देश के लिए अच्छी खबर यह रही की सितंबर महीने में कई राज्यों में हुई झमाझम बारिश ने बारिश की कमी को बहुत हद तक पूरा कर दिया है। मानसूनी बारिश का घाटा घटकर अब 12% रह गया है, जो कृषि मानकों के अनुसार गंभीर सूखे की सीमा (19% से अधिक घाटा) से काफी नीचे है । मौसम विभाग के सामान्य से कम बारिश के पूर्वानुमान के बीच खरीफ फसलों के कुल रकबे में केवल 1% की मामूली कमी आई है । धान के क्षेत्रफल में लगभग 1.63 मिलियन हेक्टेयर की गिरावट दर्ज हुई, जबकि उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर (अरहर) के रकबे में बढ़ोतरी हुई है ।

उर्वरक की उपलब्धता
राज्यों द्वारा मांगी गई 38 मिलियन टन उर्वरक की आवश्यकता के मुकाबले भारत के पास 16.3 मिलियन टन से अधिक का स्टॉक मौजूद है, जो पिछले साल (12.2 मिलियन टन) से काफी अधिक है । यही कारण है कि सरकार किसानों से कह रही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों के उतार-चढ़ाव का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया जाएगा ।
‘खेत बचाओ अभियान’
हालांकि इसके बावजूद मिट्टी की जरूरत के हिसाब से संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा । इसके पायलट प्रोजेक्ट से उर्वरक खपत में 27% की कमी आई थी और ₹1,400 करोड़ से अधिक की बचत हुई थी । वहीं कम पानी वाले क्षेत्रों में किसानों को अधिक पानी वाली फसलों के स्थान पर दलहन, तिलहन और मोटे अनाज उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ।
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