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सरकारी नौकरी पर संकट, खेती में कम होता मुनाफा और परिवार की छोटी होती जमीन : खतरे में ग्रामीण अर्थव्यवस्था

राज्य के युवा आज रोजगार के लिए आंदोलन कर रहे हैं। युवा चाहते हैं उन्हें उचित अवसर मिले। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कई मौकों पर कह चुके हैं कि राज्य के युवा सिर्फ सरकारी नौकरी के भरोसे ना बैठें। उन्होंने दूसरे रोजगार की सलाह भी दी जिसमें बकरी, मुर्गी, मछली पालन सहित कई रास्ते थे लेकिन राज्य की रीढ़ जिससे मजबूत है कृषि उसका हाल क्या है। राज्य के वित्त विभाग द्वारा फरवरी 2026 में विधानसभा में पेश आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में कृषि की हिस्सेदारी घटकर करीब छह प्रतिशत रह गई है, जबकि 2011-12 में यह 9.65 प्रतिशत थी।

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झारखंड में छात्र आंदोलन में हमारे गांव का कितना हिस्सा है। इस आंदोलन ग्रामीण इलाकों के फायदे और नुकसान क्या हैं ? यह आंदोलन उस वक्त तेजी पकड़ रहा है जब खेती का मौसम है। ऐसे में इस पर क्या असर पड़ रहा है। 2011 के आंकड़े पर ही इसे आंकने और समझने की कोशिश होगी। झारखंड की 75.95 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों से है। मतलब राज्य की आबादी का महज 24.05 प्रतिशत इलाका शहरी है। यह आंदोलन राज्य की दिशा और जनगणना 2011अनुसार राज्य की कुल जनसंख्या 3,29,88,134 थी, जिसमें से 2,50,55,073 लोग यानी करीब 75.95 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती थी, जबकि शहरी आबादी महज 24.05 प्रतिशत (79,33,061) थी। यानी झारखंड बनने के दो दशक से ज्यादा बीतने के बावजूद राज्य की तीन-चौथाई से ज्यादा आबादी आज भी गांव में रहती है। राज्य में करीब 32,600 से ज्यादा गांव हैं। अनुसूचित जनजाति की आबादी करीब 86.45 लाख है, जो राज्य की कुल जनसंख्या का 26.2 प्रतिशत है।

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कम होता मुनाफा और छोटी होती जमीन

राज्य के युवा आज रोजगार के लिए आंदोलन कर रहे हैं। युवा चाहते हैं उन्हें उचित अवसर मिले। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कई मौकों पर कह चुके हैं कि राज्य के युवा सिर्फ सरकारी नौकरी के भरोसे ना बैठें। उन्होंने दूसरे रोजगार की सलाह भी दी जिसमें बकरी, मुर्गी, मछली पालन सहित कई रास्ते थे लेकिन राज्य की रीढ़ जिससे मजबूत है कृषि उसका हाल क्या है। राज्य के वित्त विभाग द्वारा फरवरी 2026 में विधानसभा में पेश आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में कृषि की हिस्सेदारी घटकर करीब छह प्रतिशत रह गई है, जबकि 2011-12 में यह 9.65 प्रतिशत थी। इसके उलट सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 2011-12 के 38.5 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 45.56 प्रतिशत हो गई है। यानी कृषि की सापेक्ष हिस्सेदारी घट रही है, भले ही कृषि उत्पादन के पूर्ण आंकड़ों में बढ़ोतरी हुई है। झारखंड कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का बड़ा हिस्सा (79,714 वर्ग किमी में से 18,423 वर्ग किमी) वन क्षेत्र है, जबकि कृषि योग्य भूमि महज 38 लाख हेक्टेयर के आसपास है यानी सीमित उपजाऊ जमीन पर बड़ी आबादी का हिस्सा है। इसका सीधा अर्थ है कि राज्य में कृषि योग्य जमीन जितनी होनी चाहिए उतनी नहीं है।

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बेहतर भविष्य की आस में लाठियां खा रहे हैं युवा

कृषि जनगणना 2015-16 के अनुसार देश में 86.1 प्रतिशत किसान लघु व सीमांत श्रेणी (2 हेक्टेयर से कम भूमि वाले) में आते हैं, और झारखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल व उत्तर प्रदेश जैसे कम प्रति व्यक्ति आय वाले राज्यों में छोटी जोत वाले किसानों का बोलबाला है। इन राज्यों में किसान परिवारों की आमदनी का बड़ा हिस्सा मजदूरी और पशुपालन पर निर्भर है। रांची जिले के कृषि आधार-रेखा सर्वेक्षण (2003-04) के पुराने आंकड़ों के मुताबिक भी जिले में सीमांत किसानों (1 हेक्टेयर से कम भूमि) की तादाद सबसे ज्यादा थी, इसके बाद छोटे किसान (1-2 हेक्टेयर) की संख्या थी। पीढ़ी-दर-पीढ़ी जमीन के बंटवारे से जोत का आकार लगातार घट रहा है। इसका सीधा अर्थ है कि जो युवा रोजगार के लिए पुलिस की लाठियां खा रहे हैं अगर वो घर भी लौट जाते हैं तो उनके पास बहुत पर्याप्त जमीन नहीं है जिसमें वो खेती पर निर्भर रहें। झारखंड में केंद्रीय अर्थशास्त्रियों और शोध संस्थाओं का आकलन है कि छोटी जोत पर खेती से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। बढ़ती इनपुट लागत, मौसम की अनिश्चितता, सिंचाई की कमी और बाजार में उतार-चढ़ाव एक बड़ी वजह है। ग्रामीण परिवारों के लिए पैतृक जमीन अब जीविका की मुख्य गारंटी नहीं रह गई है, और परिवार अतिरिक्त आय के लिए मजदूरी, पलायन या गैर-कृषि रोजगार की ओर रुख कर रहे हैं। पहाड़ी और जंगली इलाकों में सिंचाई की सुविधा आज भी बेहद सीमित है जैसे हजारीबाग जैसे जिलों में किसान आज भी बारिश पर निर्भर खेती करते हैं।

राज्य के 71 प्रतिशत युवा नौकरी की तलाश में

झारखंड ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा अगस्त-सितंबर 2025 में राज्य के 18 जिलों में कराए गए एक सर्वेक्षण में 4,678 युवाओं से बातचीत की गई। इसमें सामने आया कि 71 प्रतिशत नौकरी की तलाश में हैं, जबकि 15 प्रतिशत पढ़ाई कर रहे हैं और बाकी खेती व अनियमित रोजगार में लगे हैं। सर्वे में यह भी बताया गया कि रोजगार के सीमित अवसरों के चलते झारखंड से पलायन बढ़ रहा है, और समिति ने कृषि, कृषि आधारित उद्योग, कुटीर उद्योग व स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार बढ़ाने तथा सरकारी विभागों के खाली पदों पर नियमित नियुक्ति की मांग की। आप आंकड़े की गंभीरता से समझिए कि राज्य में रोजगार को लेकर हालात क्या है। आपकी यह चिंता और बढ़ेगी जब आप नीति आयोग के हवाले से आई एक रिपोर्ट पढ़ेंगे जिसमें राज्य में 14 से 18 आयु वर्ग के करीब 58.7 प्रतिशत युवाओं को ठीक से पढ़ना-लिखना नहीं आता। हाल के UDISE आंकड़ों के अनुसार राज्य में ड्रॉपआउट दर भी बढ़ी है। यह 3.50 प्रतिशत से बढ़कर 6.6 प्रतिशत हो गई है। यानी एक तरफ बड़ी तादाद में युवा रोजगार खोज रहे हैं, दूसरी तरफ स्कूली शिक्षा की बुनियाद भी कमजोर बनी हुई है। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं पर निर्भरता और बढ़ती है, जो मौजूदा JPSC-JSSC विवाद की एक बड़ी वजह भी है।

झारखंडी पगडंडी से बड़े शहरों में भटकते युवा

राज्य में कितने युवा रोजगार के लिए बाहर हैं, कितने उच्च शिक्षा के लिए बाहर हैं इसका कोई स्पष्ट आंकड़ा राज्य सरकार के पास नहीं है। झारखंड सरकार की ई-कल्याण छात्रवृत्ति योजना खुद इस पलायन को स्वीकार करती है। यह योजना विशेष रूप से राज्य के बाहर पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देती है, ताकि आर्थिक तंगी के चलते उन्हें पढ़ाई से समझौता न करना पड़े। राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात (GER) पहली बार 30 प्रतिशत तक पहुंचा है (AISHE रिपोर्ट 2023-24), लेकिन झारखंड जैसे राज्यों में स्थानीय उच्च शिक्षा ढांचे की सीमाओं के चलते बड़ी संख्या में छात्र रांची से बाहर — पटना, दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु जैसे शहरों का रुख करते हैं।

बढ़ रहा है संकट

आंकड़ों के माध्यम से एक साफ तस्वीर दिखाई देती है। झारखंड की तीन-चौथाई आबादी गांवों में है,छोटी होती जमीन, कम मुनाफा, रोजगार के कम साधन एक बड़ी समस्या के रूप में सामने खड़ी है। भारत आज भी गांवों का देश है ऐसे में राज्य की यह हालात देश की हालत भी बयां करती है। बड़ी तादाद में युवा या तो सरकारी नौकरी, या पलायन, या असंगठित मजदूरी में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।

इस लेख को तैयार करने के लिए आंकड़ों के स्रोत (Sources)
जनसंख्या व ग्रामीण-शहरी वितरण: जनगणना भारत 2011 (Census of India 2011)
जनजातीय जनसंख्या:TRI झारखंड (जनजाति अनुसंधान संस्थान) का आधिकारिक डेटा पेज।
आर्थिक सर्वेक्षण व GSVA में कृषि/सेवा क्षेत्र की हिस्सेदार
लघु व सीमांत किसान (राष्ट्रीय व झारखंड संदर्भ)
कृषि जनगणना 2015-16 (Agriculture Census, भारत सरकार
हजारीबाग जिला कृषि आधार-रेखा सर्वेक्षण, 2003-04
युवा बेरोजगारी सर्वेक्षण (2025): झारखंड ज्ञान विज्ञान समिति का 18-जिला सर्वेक्षण
साक्षरता व स्कूल ड्रॉपआउट दर
उच्च शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाने वाले छात्रों हेतु राज्य सरकार की योजना
राष्ट्रीय उच्च शिक्षा नामांकन अनुपात (GER)

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