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Panchayat Darpan

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ग्रामीण स्वच्छता में बढ़ा कदम, 5.63 लाख गांवों में हुआ लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के दूसरे चरण के तहत देश के 5,86,944 गांवों में से 5,63,809 गांवों को तरल कचरा प्रबंधन यानी Liquid Waste Management की व्यवस्था से जोड़ा गया है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से SBM(G) के Integrated Management Information System (IMIS) पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार यह स्थिति 7 अगस्त 2026 तक की है। योजना का उद्देश्य गांवों को खुले में शौच से मुक्त बनाए रखने के साथ ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन कर उन्हें ODF Plus (Model) गांवों की दिशा में आगे बढ़ाना है।

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घर और गांव दोनों स्तर पर हो रहा ग्रे वाटर प्रबंधन

SBM(G) Phase-II के तहत गंदे पानी के प्रबंधन के लिए घरों में सोक पिट, लीच पिट, मैजिक पिट और किचन गार्डन जैसी व्यवस्थाएं अपनाई जा सकती हैं। वहीं सामुदायिक स्तर पर Waste Stabilization Ponds, Constructed Wetland, DEWATS और Phytorid Technology जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। 7 अगस्त तक राज्यों ने कुल 42,98,194 सामुदायिक ग्रे वाटर मैनेजमेंट परिसंपत्तियों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज की है। इनमें 25,50,998 सामुदायिक सोक/लीच/मैजिक पिट, 14,77,238 ड्रेनेज सुविधाएं और 2,69,958 सामुदायिक ग्रे वाटर प्रबंधन सिस्टम शामिल हैं।

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झारखंड में भी हजारों परिसंपत्तियां दर्ज

झारखंड में भी ग्रामीण क्षेत्रों में तरल कचरा प्रबंधन को लेकर काम दर्ज किया गया है। राज्य में 1,36,636 सामुदायिक सोक पिट, लीच पिट या मैजिक पिट बनाए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा 42,679 ड्रेनेज सुविधाएं, 28,577 टर्मिनेशन प्वाइंट और 9,997 सामुदायिक ग्रे वाटर मैनेजमेंट सिस्टम दर्ज किए गए हैं। देश के राज्यों में उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 4,11,424 सामुदायिक सोक/लीच/मैजिक पिट और 6,12,329 ड्रेनेज सुविधाएं दर्ज की गई हैं।

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केंद्र दे रहा तकनीकी और वित्तीय सहायता

जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को योजना लागू करने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता दी जा रही है। ग्रे वाटर मैनेजमेंट के लिए 5,000 तक की आबादी वाले गांवों को प्रति व्यक्ति अधिकतम 280 रुपये और 5,000 से अधिक आबादी वाले गांवों को प्रति व्यक्ति 660 रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान है। राज्यों को जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपनी वार्षिक कार्ययोजना में योजनाएं शामिल करने की छूट है। इसके लिए वित्त आयोग के ग्रामीण निकायों के अनुदान, मनरेगा/वीबी-जी राम जी और अन्य केंद्रीय व राज्य योजनाओं के साथ फंड का समन्वय भी किया जा सकता है।

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लक्ष्य सिर्फ नाली बनाना नहीं, गांवों में स्वच्छता बनाए रखना

SBM(G) Phase-II को 1 अप्रैल 2020 से लागू किया गया था। इसका मुख्य जोर ODF की स्थिति को बनाए रखने के साथ ठोस और तरल कचरा प्रबंधन तथा गांवों की दृश्य स्वच्छता पर है। मंत्रालय की ओर से ग्राम पंचायतों की क्षमता बढ़ाने के लिए तकनीकी मैनुअल और Standard Operating Procedures भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही ग्रामीणों की भागीदारी और व्यवहार में बदलाव के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, ताकि गांवों में गंदे पानी का ठहराव रोका जा सके। यह जानकारी केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने 13 अगस्त 2026 को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

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