जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण, जैव विविधता में कमी और प्राकृतिक संसाधनों के लगातार दोहन जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां अब केवल वैज्ञानिकों और सरकारों तक सीमित नहीं रह गई हैं। इनका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर भी पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विद्यार्थियों के लिए ‘मिशन लाइफ-पर्यावरण के लिए जीवनशैली’ नाम से विशेष ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू किया है। यह कोर्स UGC के स्वयम् मंच पर उपलब्ध है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों की जानकारी देने के साथ उन्हें ऐसी जीवनशैली के लिए तैयार करना है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल हो। कोर्स की शुरुआत 21 अगस्त 2026 से होगी और इसकी अवधि 10 सप्ताह रखी गई है। स्नातक स्तर के विद्यार्थियों के लिए यह 2 क्रेडिट का पाठ्यक्रम है। इच्छुक विद्यार्थी 31 अगस्त 2026 तक इसमें पंजीकरण करा सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन से लेकर ई-कचरा प्रबंधन तक पढ़ेंगे
पाठ्यक्रम में पर्यावरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। इसमें विद्यार्थियों को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण प्रदूषण के कारणों और प्रभावों को समझने का अवसर मिलेगा। इसके साथ जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र की सेवाएं, टिकाऊ उपभोग और व्यवहार में बदलाव जैसे विषय भी पढ़ाए जाएंगे। पाठ्यक्रम में ऊर्जा, पानी और कचरे के आकलन पर भी विशेष जोर दिया गया है। विद्यार्थी चक्रीय अर्थव्यवस्था, ई-कचरा प्रबंधन, टिकाऊ खाद्य प्रणालियों और ठोस कचरा प्रबंधन के बारे में भी जानकारी हासिल करेंगे। यानी पाठ्यक्रम का उद्देश्य केवल पर्यावरणीय समस्याओं की सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को यह समझाना भी है कि रोजमर्रा के स्तर पर इन चुनौतियों से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
पढ़ाई ही नहीं, व्यवहार में बदलाव पर भी जोर
इस पाठ्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के साथ सामुदायिक भागीदारी से भी जोड़ा गया है। विद्यार्थियों को पानी और ऊर्जा की बचत, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, कचरे के उचित प्रबंधन और टिकाऊ उपभोग जैसी आदतों के महत्व को समझाया जाएगा। इसके माध्यम से यह बताने की कोशिश की जाएगी कि पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े स्तर की योजनाओं के साथ छोटे-छोटे व्यक्तिगत बदलाव भी महत्वपूर्ण हैं। विद्यार्थियों को अपने आसपास मौजूद पर्यावरणीय समस्याओं को पहचानने और उनके समाधान में अपनी भूमिका समझने का अवसर मिलेगा। सामुदायिक स्तर पर पर्यावरणीय कार्रवाई और भागीदारी को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। इससे युवा पर्यावरण संरक्षण को केवल एक विषय के तौर पर नहीं, बल्कि अपनी जीवनशैली और सामाजिक जिम्मेदारी के हिस्से के रूप में देख सकेंगे।
31 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन, परीक्षा पास करने पर प्रमाणपत्र
इस ऑनलाइन पाठ्यक्रम के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। कोर्स 21 अगस्त से शुरू होकर 10 सप्ताह तक चलेगा। स्नातक स्तर के विद्यार्थियों के लिए इसमें 2 क्रेडिट निर्धारित हैं। पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होना होगा। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की निगरानी में आयोजित परीक्षा को सफलतापूर्वक पास करने वाले विद्यार्थियों को स्वयम् प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। ऐसे विद्यार्थी जो जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जैव विविधता, कचरा प्रबंधन और टिकाऊ जीवनशैली जैसे विषयों में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह कोर्स उपयोगी हो सकता है। इससे पर्यावरण संबंधी समझ बढ़ाने के साथ विद्यार्थियों को अपने व्यवहार में व्यावहारिक बदलाव करने का अवसर भी मिलेगा।
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