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PM किसान सम्मान में झारखंड को झटका: एक साल में 3.71 लाख लाभुक घटे, लैंड वेरिफिकेशन बना रोड़ा

झारखंड में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभुकों की संख्या एक साल में 3.71 लाख से अधिक घट गयी है। मार्च 2025 में जहां राज्य के 22.74 लाख किसानों को योजना की किस्त मिली थी, वहीं मार्च 2026 में यह संख्या घटकर 19.01 लाख रह गयी। बड़ी संख्या में किसानों की राशि जमीन के वार्षिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण अटक गयी है। योजना का लाभ जारी रखने के लिए किसानों का ई-केवाईसी कराने के साथ जमीन का सत्यापन भी जरूरी है। बताया जा रहा है कि राज्य में अंचलाधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले का असर भी जमीन सत्यापन की रफ्तार पर पड़ा है। कई अंचलों में सत्यापन का काम अपेक्षित गति से नहीं हो सका। कृषि विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को किसानों की जमीन और वंशावली का सत्यापन जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है, ताकि पात्र किसानों को योजना की अगली किस्त मिल सके।

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पांच साल में चार गुना बढ़ी लाभुकों की संख्या

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में झारखंड के किसानों की संख्या पिछले पांच वर्षों में कई गुना बढ़ी है। मार्च 2019 में योजना शुरू होने के समय राज्य के 5.65 लाख किसान इसके लाभुक थे। मार्च 2020 में यह संख्या बढ़कर 7.08 लाख हुई। नवंबर 2020 तक 22.77 लाख किसानों को योजना का लाभ मिलने लगा था। उस समय राज्य में जमीन का सर्वे पूरा नहीं होने के कारण केंद्र सरकार ने झारखंड को विशेष छूट दी थी। बाद में किसान और जमीन के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ लाभुकों की संख्या घटने लगी। मार्च 2022 में 16.59 लाख और मार्च 2023 में महज 11.76 लाख किसानों को योजना का लाभ मिला। इसके बाद सत्यापन की प्रक्रिया में सुधार के साथ संख्या फिर बढ़ी और मार्च 2024 में 16.18 लाख तथा मार्च 2025 में 22.74 लाख पहुंच गयी। अब मार्च 2026 में यह संख्या फिर घटकर 19.01 लाख हो गयी है।

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झारखंड में अब तक 9695 करोड़ का भुगतान

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत झारखंड के किसानों को अब तक करीब 9695 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। वर्ष 2019 में शुरू हुई इस योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना छह हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन किस्तों में चार-चार महीने के अंतराल पर किसानों के बैंक खाते में भेजी जाती है। आम तौर पर पहली किस्त मार्च, दूसरी जुलाई और तीसरी किस्त नवंबर में जारी की जाती है। राज्य में अब तक किसानों के बीच 23 किस्तों की राशि वितरित की जा चुकी है। विभाग की कोशिश है कि जिन किसानों का भुगतान जमीन सत्यापन या वंशावली सत्यापन के कारण रुका है, उनका रिकॉर्ड जल्द दुरुस्त किया जाए। सत्यापन पूरा होने के बाद पात्र किसानों को योजना का लाभ दोबारा मिल सकेगा। कृषि विभाग ने जिलों से इस काम में तेजी लाने को कहा है, ताकि बड़ी संख्या में किसान योजना के लाभ से बाहर न हों।

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