संथाल परगना में घर-घर बिजली पहुंचाने के मामले में सुधार हुआ है, लेकिन बेहतर पेयजल स्रोत की उपलब्धता चिंता बढ़ाने वाली है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-5 और एनएफएचएस-6 के आंकड़ों की तुलना में पांच जिलों में बिजली की पहुंच बढ़ी है, जबकि चार जिलों में बेहतर पेयजल स्रोत वाले घरों का प्रतिशत घटा है। पाकुड़ में बिजली वाले घरों का प्रतिशत 91.7 से बढ़कर 96.6, साहिबगंज में 91.6 से 97.5, जामताड़ा में 92.2 से 96.3, गोड्डा में 93.5 से 97.9 और देवघर में 95.6 से बढ़कर 98 प्रतिशत हो गया। वहीं, दुमका में बिजली की पहुंच में 0.5 प्रतिशत अंक की मामूली गिरावट दर्ज हुई और यह 97.1 प्रतिशत रह गई।
जामताड़ा में बेहतर पेयजल स्रोत की उपलब्धता 7.1 अंक घटी
बेहतर पेयजल स्रोत वाले घरों के आंकड़े बिजली की पहुंच से अलग तस्वीर दिखाते हैं। जामताड़ा में सबसे अधिक 7.1 प्रतिशत अंक की गिरावट दर्ज हुई। यहां बेहतर पेयजल स्रोत वाले घरों का प्रतिशत 93 से घटकर 85.9 हो गया। पाकुड़ में यह आंकड़ा 88.6 से घटकर 86.6, साहिबगंज में 88.2 से 86.5 और दुमका में 92.6 से घटकर 91.6 प्रतिशत रह गया। इसके विपरीत गोड्डा में बेहतर पेयजल स्रोत वाले घरों का प्रतिशत 91.4 से बढ़कर 92.1 और देवघर में 90.8 से 91 प्रतिशत हुआ। यानी संताल के छह जिलों में से चार में इस बुनियादी सुविधा की स्थिति में गिरावट आई है।

बिजली 96% पार, पेयजल में जिलों के बीच बड़ा अंतर
एनएफएचएस-5 और एनएफएचएस-6 के आंकड़ों की तुलना से स्पष्ट है कि संताल परगना के लगभग सभी जिलों में बिजली की पहुंच 96 प्रतिशत या उससे अधिक हो गई है। इसके विपरीत बेहतर पेयजल स्रोत की उपलब्धता में एकरूपता नहीं है। जामताड़ा में 7.1 प्रतिशत अंक की गिरावट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। आंकड़े बताते हैं कि बिजली पहुंचाने में सुधार के साथ पेयजल स्रोत की उपलब्धता और गुणवत्ता पर भी समान ध्यान देने की जरूरत है। बुनियादी सुविधाओं के इन दोनों मानकों में अंतर यह संकेत देता है कि बिजली की पहुंच बढ़ने के बावजूद सुरक्षित और बेहतर पेयजल की उपलब्धता अब भी कई इलाकों के लिए चुनौती बनी हुई है।