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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बदल जाएगी भारतीय कृषि की तस्वीर, कानपुर में कृषि विशेषज्ञों का मंथन

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) आने के बाद दुनिया के हर क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और इसे लेकर कई तरह के कयास भी लगाए जा रहे हैं. कृषि क्षेत्र में इसके जरिए बड़े बदलावों की उम्मीद की जा रही है. कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में आयोजित ‘एआई मंथन 2.0’ के कृषि सत्र में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), आईआईटी रोपड़ और उत्तर प्रदेश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों ने भाग लिया. सम्मेलन में वैज्ञानिकों ने रेखांकित किया कि एआई तकनीक सटीक खेती (precision farming), कीटों की सटीक पहचान, जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों और डिजिटल सलाह सेवाओं के माध्यम से भारतीय कृषि में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है.

इस आयोजन से जुड़ी मुख्य बातें

सटीक एवं सतत कृषि: आईसीएआर के अनिल राय ने स्पष्ट किया कि सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन तकनीक और रियल-टाइम डेटा विश्लेषण से पारंपरिक खेती को आधुनिक बनाया जा रहा है. इससे फसल की पैदावार बढ़ाने, किसानों की लागत कम करने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है.

 

ANNAM.AI प्लेटफ़ॉर्म: आईआईटी रोपड़ के मुकेश सैनी ने अपने संस्थान के एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा विकसित ANNAM.AI प्लेटफ़ॉर्म के बारे में जानकारी दी. इस प्लेटफ़ॉर्म के पास 24 राज्यों से फसलों के 1.08 करोड़ (10.8 मिलियन) से अधिक एनोटेटेड डेटा पॉइंट्स मौजूद हैं, जो एआई के जरिए फसलों में कीट और बीमारियों की पहचान करने में मदद करते हैं.

‘किसान सारथी’ डिजिटल एडवाइजरी: आईसीएआर के संजीव कुमार ने डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के सहयोग से तैयार किए गए ‘किसान सारथी’ प्लेटफ़ॉर्म को प्रस्तुत किया. यह डिजिटल सेवा बहुभाषी एआई परामर्श के जरिए किसानों को सीधे कृषि विशेषज्ञों से जोड़ती है.

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