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भारत में कमज़ोर मानसून से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित

अल नीनो के प्रभाव के कारण भारत में इस साल मानसून अनियमित हुई है इसका असर खरीफ फसलों पर पड़ने वाला है. असंतुलित और सामान्य से कम मानसून के कारण खरीफ फसलों की कुल बुआई में पिछले साल के मुकाबले गिरावट दर्ज की गई है. 4 सितंबर तक देश में कुल खरीफ बुआई 1,086.31 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले साल की समान अवधि के 1,104.00 लाख हेक्टेयर से 17.69 लाख हेक्टेयर कम है और दीर्घकालिक औसत (1,104.44 लाख हेक्टेयर) से भी कम है.

फसलों की स्थिति

चावल के क्षेत्रफल में सबसे बड़ी गिरावट: कुल बुआई में आई कमी का सबसे बड़ा कारण चावल यह है कि धान की खेती के रकबे में कमी आई है. चावल की बुआई 16.37 लाख हेक्टेयर घटकर 421.82 लाख हेक्टेयर रह गई है. खरीफ के अन्य फसलों जैसे तिलहन, कपास, मोटे अनाज और गन्ने के क्षेत्रफल में भी कमी दर्ज की गई है. इसके विपरीत, दालों के रकबे में 1.83 लाख हेक्टेयर और जूट तथा मेस्टा में 0.10 लाख हेक्टेयर की मामूली बढ़त देखी गई, जिसमें जूट की बुआई इस मौसम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची है.

राज्यों में प्रभाव

चावल की बुआई में आई गिरावट मुख्य रूप से कुछ राज्यों में अधिक रही है. कर्नाटक में सबसे ज्यादा 4.28 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई. इसके बाद तेलंगाना (-3.61 लाख हेक्टेयर), आंध्र प्रदेश (-1.91 लाख हेक्टेयर), उत्तर प्रदेश (-1.84 लाख हेक्टेयर) और मध्य प्रदेश (-1.75 लाख हेक्टेयर) में गिरावट देखी गई. दूसरी ओर, असम और ओडिशा उन गिने-चुने राज्यों में शामिल रहे जहाँ चावल की बुआई में बढ़ोतरी दर्ज की गई

 

मानसून का प्रदर्शन

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुरुआत में मानसून के दीर्घकालिक औसत का 92% रहने का अनुमान लगाया था, जिसे मई के अंत में घटाकर 90% कर दिया गया था. जून में बारिश सामान्य से लगभग 40% कम रही है. जुलाई में बारिश में थोड़ा सुधार हुआ, लेकिन अगस्त में फिर से 16% की कमी दर्ज की गई, जो वर्ष 2001 के बाद से सबसे सूखे अगस्त महीनों में से एक रहा. जून से अगस्त के दौरान कुल वर्षा सामान्य से 13 से 14 प्रतिशत कम रही. मेघालय, मणिपुर, बिहार, आंध्र प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में बारिश में 30 से 40 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई.

खाद्य सुरक्षा और कृषि उद्योग पर असर

अधिकारियों का मानना है कि स्थिति चिंताजनक नहीं है, क्योंकि यह गिरावट वर्ष 2025-26 के रिकॉर्ड 12.45 करोड़ (124.5 मिलियन) टन चावल उत्पादन के बाद आई है. सरकार ने इस खरीफ विपणन सत्र के लिए 708.64 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है. चावल, कपास और सोयाबीन का रकबा घटने से बीजों और थोक उर्वरकों की मांग प्रभावित हुई है. हालांकि, अनियमित बारिश के कारण फसलों को बचाने के लिए जल-घुलनशील पोषक तत्वों (water-soluble nutrients), फोलियर स्प्रे और फसल सुरक्षा उत्पादों की मांग में बढ़ोतरी देखी जा रही है.