अमेरिका के कृषि विभाग (USDA) के अनुसार, कमजोर और अनियमित दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रभाव के कारण भारत के 2026/27 मक्का (कॉर्न) उत्पादन अनुमान को 4% घटाकर 50.0 मिलियन मीट्रिक टन कर दिया गया है. यह उत्पादन पिछले वर्ष के कुल उत्पादन की तुलना में 9% कम है
उत्पादन, क्षेत्रफल और उपज के प्रमुख आंकड़े
- कुल उत्पादन: 50.0 मिलियन मीट्रिक टन (पिछले महीने के अनुमान से 4% और पिछले वर्ष से 9% कम)
- कटाई का क्षेत्रफल (Harvested Area): 14.0 मिलियन हेक्टेयर (पिछले महीने और पिछले वर्ष दोनों की तुलना में 3% कम)
- प्रति हेक्टेयर उपज (Yield): 3.57 टन प्रति हेक्टेयर (मासिक आधार पर 1% और वार्षिक आधार पर 7% कम)

मानसून और खरीफ सीजन की स्थिति
भारत के कुल मक्का उत्पादन का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा खरीफ सीजन से आता है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर करता है. मई के अंत में मानसून के आगमन में देरी के कारण मक्का की बुवाई की गति धीमी रही. जुलाई की बारिश से बुवाई में कुछ सुधार हुआ, लेकिन 4 सितंबर तक मक्का का कुल रकबा पिछले साल से 2% नीचे रहा. उपग्रह वनस्पति सूचकांक (NDVI) के आंकड़ों से पता चलता है कि मध्य भारत में फसल की स्थिति पिछले साल और दीर्घकालिक औसत की तुलना में कमजोर रही है.
उद्योगों पर प्रभाव और रबी सीजन की उम्मीदें
खरीफ मक्का उत्पादन में कमी का सीधा असर भारत के पोल्ट्री (मुर्गी पालन) व पशु आहार उद्योग और इथेनॉल उत्पादन कार्यक्रम पर पड़ेगा. आपूर्ति में कमी के कारण आने वाले महीनों में घरेलू मक्का और चारे की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बन सकता है. खरीफ मक्का की कटाई सितंबर में शुरू हो चुकी है. अब ध्यान रबी (सर्दियों की) फसल पर केंद्रित है, जिसकी बुवाई अक्टूबर से शुरू होती है. यदि रबी सीजन में सिंचाई, बीज और नमी की स्थिति अच्छी रहती है, तो खरीफ में हुई कमी की कुछ हद तक भरपाई हो सकती है.
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