केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रांची के गढ़खटंगा स्थित इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ एग्रीकल्चर बॉयोटेक्नोलॉजी के नए प्रशासनिक भवन समेत 119 करोड़ रुपये की लागत की योजनाओं का ऑनलाइन उद्घाटन और शिलान्यास किया. अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) एवं जनजातीय उप-योजना (TSP) के अंतर्गत पूर्व रबी किसान गोष्ठी एवं कृषि सामग्री वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने सबसे पहले झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता और दिशोम गुरु की पत्नी रूपी सोरेन के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि झारखंड की धरती बलिदान और स्वाभीमान की धरती है. झारखंड की माटी सभी का मन मोह लेती है. उन्होंने कहा कि आज झारखंड समेत पूर्वी भारत के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण दिन है. आईआईएबी झारखंड की कृषि और किसानों के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहा है. साथ ही कहा की किसानों को समृद्ध बनाने के लिए किसानों तक वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की जानकारी पहुंचानी होगी. कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार के पास यूरिया और डीएपी का पर्याप्त स्टॉक है, किसानों को इसकी कमी नहीं होने दी जाएगी. इस मौके पर शिवराज सिंह चौहान ने आईआईएबी के नए प्रशासनिक भवन का उद्घाटन किया. इसके अलावा जयपाल सिंह मुंडा भवन, बिरसा मुंडा भवन और नेक्सटजेन ब्रीडिंग सेंटर का उद्घाटन किया.
भगवान से कम नहीं है किसान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि एवं कल्याण राज्यमंत्री भगीरथ चौधरी ने कहा कि किसान भगवान नहीं है लेकिन भगवान से भी कम नहीं है, क्योंकि किसान हमारे अन्नदाता है और किसान हमारा पेट भरते हैं. हिंदु्स्तान तब समृद्ध राष्ट्र बनेगा जब यहां के किसान समृद्ध होंगे. भगीरथ चौधरी ने कहा कि 2014 से हर साल किसानों के लिए फसलों की एमएसपी बढ़ाई जा रही है. मूल्य बढ़ने का फायदा किसानों को हो रहा है. खेत बचाओ अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नई तकनीक के आधार पर खेती को आगे बढ़ाने के आवश्यकता है. राज्य मंत्री ने कहा कि किसानों को अपने खेती के मिट्टी की अवश्य जांच करानी चाहिए इससे उत्पादन बढ़ाने और फसलों का चयन करने में काफी मदद मिलती है.

किसानों के लिए वरदान
आईसीएआर के डीजी डॉ एम.एल जाट ने कहा कि यह संस्थान झारखंड के किसानों के लिए वरदान साबित होगा. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विज्ञान जब तक किसानों के पास नहीं पहुंचेगा तब तक किसानों का विकास नहीं होगा. उन्होंने बताया कि इंटीग्रेडेट फार्मिंग के क्षेत्र में इस संस्थान ने काफी अच्छा काम किया है. साथ ही कहा कि झारखंड के अधिकांश क्षेत्रों में किसान सिर्फ धान की खेती करते हैं और खेती फिर पूरे साल खाली रहता है. इस पद्धति को बदलने की जरूरत है. राज्य के किसान दलहन और तिलहन की खेती को अपना सकते हैं, झारखंड में इसकी बहुत संभावनाएं हैं और किसानों को इससे लाभ होगा, उनकी कमाई बढ़ेगी.
किसानों के लिए कार्य कर रहा है संस्थान
आईआईएबी के निदेशक डॉ सुजय रक्षित ने कहा कि यह संस्थान झारखंड में कृषि और किसानों के विकास के लिए कार्य कर रहा है. राज्य के किसानों की कृषि संबंधित चुनौतियों से निबटने के लिए यहां के वैज्ञानिक निरंतर नए शोध कर रहे हैं और बेहतरीन विकल्प किसानों के लिए दे रहे हैं. साथ ही उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि अगर कृषि से संबंधित किसी प्रकार की परेशानी आती है तो वे संस्थान में संपर्क कर सकते हैं. कार्यक्रम के दौरान किसानों को कृषि से संबंधित उपकरण और सामग्रियों का वितरण किया गया.