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Panchayat Darpan

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नेपाल की बाढ़ के बाद बिहार में ‘अज्ञात’ मछलियों का खौफ: खाने से लोग पड़ रहे बीमार, सरकार ने जारी की सख्त चेतावनी

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक जलप्रलय के बाद बिहार के सीमावर्ती जिलों में एक नया संकट खड़ा हो गया है. नेपाल की नदियों से बहकर आ रहे बाढ़ के पानी के साथ राज्य में बड़ी मात्रा में रहस्यमयी, विशालकाय और ‘अज्ञात’ मछलियां आ पहुंची हैं. इन मछलियों को खाने के बाद कई इलाकों में लोगों के बीमार होने की खबरें आ रही हैं, जिसके बाद बिहार सरकार ने आपातकालीन एडवाइजरी जारी की है.

नेपाल की बाढ़ से बिहार की नदियों में उफान

हाल ही में नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों (रसुवा के लांगटांग-लिरुंग क्षेत्र) में ग्लेशियर टूटने और हिमस्खलन (एवलांच) के कारण भीषण तबाही मचाने वाली बाढ़ आई. नेपाल की त्रिशूली नदी का यह दूषित पानी अब गंडक और कोसी नदियों के रास्ते बिहार में प्रवेश कर चुका है. इस भारी जलप्रवाह को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 फाटकों को खोल दिया है और कोसी बैराज के भी 20 फाटक खोले गए हैं.

बिहार में हालात और इन जिलों में बाढ़ का खतरा

इस जलप्रलय के कारण उत्तर बिहार के कई जिलों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. प्रशासन ने पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, सारण और वैशाली जिलों को हाई अलर्ट पर रखा है. यह नदियां अपने साथ नेपाल से भारी मात्रा में गाद, गाद-मिट्टी, पेड़ों के तने, घरेलू मलबे के साथ-साथ मृत पशुओं के शव और गंदगी भी बहाकर ला रही हैं, जिससे संक्रामक महामारियों का खतरा बढ़ गया है

मछलियां खाने से बीमार हुए लोग

गंडक नदी की बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई अजीब और असामान्य अज्ञात मछलियां बिहार के निचले इलाकों और स्थानीय जलाशयों में देखी जा रही हैं, खासकर पश्चिम चंपारण और गोपालगंज जिलों में, इन मछलियों को पकड़कर खाने के बाद स्थानीय लोगों में पेट दर्द, गंभीर दस्त, उल्टी और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण देखे गए हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल से बहकर आई इन मछलियों में मुख्य रूप से ‘बगैरियस बगैरियस’ (Bagarius bagarius) प्रजाति शामिल है, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘गोंच’ या ‘गोचिता’ कैटफिश कहा जाता है. यह एक मांसाहारी मछली है, जो नेपाल की त्रिशूली नदी के किनारे बने श्मशान घाटों के पास पानी में बहने वाले अधजले मानव शवों को खाती है. इसके अलावा, बाढ़ के प्रदूषित पानी, गंदे नालों और सड़ रहे पशुओं के लगातार संपर्क में रहने के कारण ये मछलियां जीवाणु (बैक्टीरिया), विषाणु (वायरस) और कवक (फंगस) से संक्रमित हो चुकी हैं. यह प्रजाति मरने के बाद बहुत तेजी से सड़ती है और जहरीली हो जाती है

बिहार सरकार की आवश्यक एडवाइजरी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिहार के डेयरी, पशु संसाधन और मत्स्य पालन विभाग ने सार्वजनिक चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है-

  • मत्स्य पालन मंत्री नंद किशोर राम ने लोगों और मछुआरों से अपील की है कि वे इन मछलियों को पकड़ने, बेचने या खाने से पूरी तरह परहेज करें
  • विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक प्रदूषित पानी से पकड़ी गई इन असामान्य मछलियों को धोने या अच्छी तरह पकाने (कुकिंग) से भी इनके अंदर मौजूद रासायनिक प्रदूषक और बैक्टीरिया नष्ट नहीं होते हैं
  • यदि किसी व्यक्ति ने यह मछली खाई है और उसमें उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर आना या सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क करें
  • कहीं भी ऐसी अज्ञात और असामान्य मछली दिखने पर तुरंत स्थानीय प्रशासन या जिला मत्स्य पदाधिकारी को सूचित करें