गांव की जिन महिलाओं की पहचान कभी घर की चारदीवारी तक सीमित थी, आज वही महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रही हैं। चतरा जिले में महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़कर करीब 1.40 लाख महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। जिले में करीब 12 हजार स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। इन समूहों ने महिलाओं को केवल बचत और ऋण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें स्वरोजगार और आर्थिक फैसलों से जोड़कर गांव में उनकी नई पहचान बनाई है। समूहों के माध्यम से जरूरतमंद ग्रामीणों को महज एक प्रतिशत मासिक साधारण ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को साहूकारों के महंगे कर्ज से राहत मिल रही है और छोटी जरूरतों के लिए बैंक की जटिल प्रक्रिया से भी काफी हद तक छुटकारा मिला है। खेती-किसानी, पशुपालन, छोटे कारोबार और बच्चों की पढ़ाई जैसी जरूरतों के लिए लोग समूहों से कर्ज ले रहे हैं।
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सिर्फ कर्ज नहीं, महिलाओं को मिला फैसले लेने का हक
महिला समूहों की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी दिया है। पहले परिवार की आय और खर्च से जुड़े फैसलों में महिलाओं की भूमिका सीमित रहती थी। अब समूहों से जुड़ी महिलाएं बचत करती हैं, ऋण लेती हैं, कारोबार शुरू करती हैं और जरूरत पड़ने पर दूसरी महिलाओं व ग्रामीण परिवारों को भी आर्थिक मदद उपलब्ध कराती हैं। जेएसएलपीएस और बैंकिंग संस्थानों के सहयोग से समूहों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं। प्रत्येक समूह को करीब 7.80 लाख रुपए की सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिसमें 6 लाख रुपए बैंक ऋण और 1.80 लाख रुपए सरकारी अनुदान शामिल है। इस राशि का इस्तेमाल महिलाएं अपनी आजीविका के साधन खड़े करने में कर रही हैं। इससे गांवों में छोटे कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है और परिवारों की आमदनी के नए स्रोत तैयार हो रहे हैं।
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‘गांव की बैंक’ बनकर महिलाओं ने लिखी बदलाव की कहानी
महिला स्वयं सहायता समूह अब गांवों में सिर्फ बचत करने वाले समूह नहीं रह गए हैं, बल्कि आर्थिक बदलाव के केंद्र बन रहे हैं। विभिन्न प्रखंडों में समूहों की सक्रियता से बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी आजीविका चला रही हैं। मिश्रौल आजीविका महिला संकुल स्वावलंबी सहकारी समिति समेत विभिन्न संकुल संगठनों की वार्षिक आमसभाओं में महिलाओं की भागीदारी, समूहों की उपलब्धियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति पर चर्चा हो रही है। जेएसएलपीएस की ओर से महिलाओं को प्रशिक्षण देकर नए रोजगार से जोड़ने का काम भी जारी है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक गौरव जायसवाल ने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूह ग्रामीण समाज में बदलाव की मजबूत कड़ी बन चुके हैं। कम ब्याज पर ऋण की सुविधा ने महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा है। आने वाले समय में और अधिक महिलाओं को समूहों से जोड़कर इस पहल को मजबूत किया जाएगा।