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Panchayat Darpan

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धनबाद की 21 पंचायतें होंगी हाईटेक, गांव में ही बनेंगे जाति-आय-निवास प्रमाणपत्र

धनबाद जिले के ग्रामीणों, खासकर युवाओं को अब जाति, आय, आवासीय और ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बनवाने के लिए प्रखंड और अंचल कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। गांव की सरकार को सशक्त बनाने के लिए जिले की 21 पंचायतों को पहले चरण में आईएसओ प्रमाणित पंचायत के रूप में विकसित किया जाएगा। इन पंचायत सचिवालयों में अब जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के साथ जाति, आय, आवासीय और ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के लिए आवेदन की सुविधा भी मिलेगी। जिला ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत सचिवालयों में सुविधाएं बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पंचायतों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप डिजिटल, पारदर्शी और नागरिक अनुकूल बनाया जाएगा। डीडीसी सन्नी राज के मुताबिक, पहले चरण की 21 पंचायतों के सफल होने के बाद इसी मॉडल पर जिले की सभी पंचायतों को आईएसओ प्रमाणित बनाने की योजना है।

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10 प्रखंडों की पंचायतें बनेंगी मॉडल सेंटर, प्रज्ञा केंद्र से ऑनलाइन होंगे काम

पहले चरण में धनबाद प्रखंड की पांडरकनाली व धोखरा, तोपचांची की पावापुर व बिहिया चतरो, कलियासोल की अलेकेंद्रा व धोबारी, टुंडी की कोलहर व लछ्रायडीह, गोविंदपुर की तिलाबनी व तिलैया, पूर्वी टुंडी की मैरनवांटांड़ व रुपण, बलियापुर की मुकुंदा व बलियापुर पश्चिम, बाघमारा की बहियारडीह व पादुगोरा, एग्यारकुंड की एग्यारकुंड उत्तर व दक्षिण तथा डूमरकुंडा दक्षिण, जबकि निस्सा की पांड्रा पश्चिम व रामकनाली पंचायत को मॉडल सेंटर बनाया जाएगा। यहां कॉमन सर्विस सेंटर (प्रज्ञा केंद्र) होगा, जहां प्रमाणपत्रों और राशन कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। सरकारी फाइलें और वित्तीय लेखा-जोखा डिजिटल रिकॉर्ड रूम में सुरक्षित रहेगा। ग्रामीणों की सुविधा के लिए टोकन या सुव्यवस्थित काउंटर, बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, शिकायत पेटी और महिला-पुरुष के लिए अलग-अलग साफ शौचालय भी होंगे।

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सूचना पट्ट से लेकर सफाई तक हर व्यवस्था होगी मानक के अनुरूप

आईएसओ पंचायतों में पारदर्शिता के लिए सूचना पट्ट लगाया जाएगा। इसमें प्रमाणपत्र मिलने की समय-सीमा, कार्यालय का समय, कर्मियों की उपस्थिति और खर्च का विवरण सार्वजनिक रहेगा। मुखिया, पंचायत सचिव, सहायक और सफाई कर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। कर्मचारियों को ग्रामीणों से विनम्र व्यवहार और समय पर फाइलों के निपटारे की ट्रेनिंग दी जाएगी। पंचायत परिसर में सूखे और गीले कचरे को अलग करने, ठोस कचरा प्रबंधन, नियमित साफ-सफाई और बिजली की पुख्ता व्यवस्था भी होगी। सुविधाएं बहाल होने के बाद पंचायतों को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय में आईएसओ प्रमाणीकरण के लिए दावा करना होगा। केंद्रीय टीम पंचायतों का जायजा लेगी और उसकी सकारात्मक रिपोर्ट के आधार पर ही आईएसओ प्रमाणित पंचायत का प्रमाणपत्र मिलेगा।