भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (IIAB) के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए कम लागत वाली ऐसी मशीन विकसित की है, जो कृषि रसायनों को नैनो रूप में बदलने में सक्षम होगी। इस पायलट-स्केल वेट मिलिंग प्रणाली को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से पेटेंट भी मिल गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तकनीक के इस्तेमाल से कम मात्रा में कृषि रसायनों का उपयोग कर अधिक प्रभावी कृषि उत्पाद तैयार किये जा सकेंगे। इससे किसानों की उत्पादन लागत घटाने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। मशीन का विकास आईआईएबी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बिप्लब सरकार के नेतृत्व में किया गया है। इसके निर्माण में सीआरआईजेएएफ, कोलकाता और निसा, रांची का भी सहयोग रहा है। प्रणाली को विशेष रूप से किसानों और किसान समूहों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि स्थानीय स्तर पर नैनो आधारित कृषि उत्पाद तैयार किये जा सकें।
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75 से 100 आरपीएम की गति से चलेगा इम्पेलर
वैज्ञानिकों के अनुसार, मशीन की क्षमता 25 लीटर है। इसमें स्टेनलेस स्टील का मजबूत बेस, 75 से 100 आरपीएम की गति से चलने वाला इम्पेलर और सिरेमिक बॉल-बेयरिंग तंत्र लगाया गया है। इसकी डिजाइन कम लागत वाली होने के साथ टिकाऊ भी है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल आसान होगा। यह प्रणाली रासायनिक और हरित, दोनों प्रकार की प्रक्रियाओं के माध्यम से पाउडर को नैनो कणों में बदल सकती है। इसके जरिये नैनो उर्वरक, नैनो कीटनाशक और नैनो खनिज जैसे कृषि उत्पाद तैयार किये जा सकेंगे। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बिप्लब सरकार ने बताया कि इस तकनीक पर वर्ष 2021 से लगातार शोध किया जा रहा था। पिछले वर्ष पेटेंट के लिए आवेदन किया गया था, जिसे अब आधिकारिक मंजूरी मिल गयी है। उन्होंने कहा कि मशीन से तैयार नैनो उत्पादों का प्रमुख लाभ यह होगा कि कम मात्रा में रसायन इस्तेमाल करने पर भी बेहतर परिणाम मिल सकेंगे। इससे किसानों की लागत कम होने के साथ पर्यावरण पर रासायनिक दबाव घटाने में भी मदद मिलेगी।
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उत्तर-पूर्व में इस्तेमाल शुरू, अब अन्य राज्यों तक पहुंचाने की तैयारी
डॉ. सरकार के अनुसार, इस तकनीक का इस्तेमाल उत्तर-पूर्व के कई राज्यों में शुरू हो चुका है और वहां इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अब इसे देश के अन्य राज्यों के किसानों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। मशीन की अनुमानित कीमत करीब दो लाख रुपये होगी। इच्छुक किसान और किसान समूह इसे प्राप्त करने के लिए आईआईएबी से संपर्क कर सकेंगे। आईआईएबी के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने इस उपलब्धि को संस्थान के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह सफलता कम लागत वाली अत्याधुनिक कृषि तकनीक विकसित करने के संस्थान के प्रयासों को मजबूती देती है। उनके अनुसार, भविष्य की खेती में नैनो तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ेगी, क्योंकि इससे कृषि संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग संभव होगा। विशेषज्ञों का भी मानना है कि पारंपरिक कृषि रसायनों की तुलना में नैनो तकनीक आधारित उत्पाद कम मात्रा में अधिक प्रभावी हो सकते हैं। ऐसे में यह मशीन केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि खेती में तकनीकी बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यदि तकनीक व्यापक स्तर पर किसानों तक पहुंचती है, तो छोटे और मध्यम किसान भी स्थानीय स्तर पर आधुनिक नैनो कृषि उत्पाद तैयार कर सकेंगे। इससे कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार को गति मिलने के साथ किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन लागत घटाने और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।