भारत सरकार ने गेहूं और गेहूं से जुड़े उत्पादों पर निर्यात बैन को हटा दिया है. इस प्रतिबंध को हटाने का उद्देश्य घरेलू बाजारों में कीमतों में आ रही गिरावट को कम करना है और किसानों की आय को बढ़ाना है. इस साल की शुरुआत में सरकार 50 लाख टन गेहूं और 10 लाख टन गेहूं के उत्पादों को निर्यात करने की अनुमति दी है. बता दे की इससे पहले साल 2022 में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गेहूं उत्पादक देश भारत ने घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. विदेश व्यापार महानिदेशालय की तरफ से जारी किए गए अधिसूचना के अनुसार गेहूं की निर्यात नीति को तत्काल प्रभाव से खत्म किया जाता है और इसे संशोधित किया गया है. निदेशालय की तरफ से जारी किए गए अधिसूचना के अनुसार गेहूं के आटे और अन्य उत्पाद जैसे मैदा, सूजी और साबूत आटे के निर्यात प्रतिबंध को भी हटा दिया गया है.
गेहूं का है पर्याप्त भंडार
पीटीआई भाषा के अनुसार खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि किसानों के हित में फैसला लेते हुए निर्यात प्रतिबंध को हटाया गया है. क्योंकि वर्तमान में घरेलू बाजारों में गेहूं की कीमतों में गिरावट आई है. निर्यात की अनुमति देने से घरेलू बाजार में कीमतों में सुधार होगा जिससे आने वाले रबी सीजन में किसान अच्छी बुवाई कर सकेंगे साथ ही किसानों को अच्छे दाम मिलेंगे. संजीव चोपड़ा ने कहा कि देश के पास गेहूं का पर्याप्त भंडार है और आने वाले समय में मांग को पूरा करने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए काफी है. उन्होंने आगे कहा कि गेहूं के निर्यात करने के लिए पहले लाइसेसं के जरिए अनुमति दी जाती थी, लेकिन अब नियमों को आसान बना दिया गया है. साथ ही बताया की पहले जो 60 लाख टन निर्यात की अनुमति दी गई थी उसमें से 2.5 लाख टन का निर्यात हो चुका है.
स्थिर है कीमतें
भारत में गेहूं के उत्पादन की बात करें तो साल 2025-26 जून-जुलाई में रिकॉर्ड 120.65 मिलियन टन रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में इसका उत्पादन 117.94मिलियन टन था. इसके साथ ही भारत में खाद्य वितरण करने वाली एजेंसी फूड कॉर्पोरेशन और इंडिया (FCI) के पास बफर स्टॉक में लगभग 49 मिलियन टन गेहूं है. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के अनुसार, 2026-27 सीजन के अंत तक भारत में गेहूं का यह स्टॉक ऐतिहासिक रूप से उच्चतम स्तर पर पहुंच सकता है. देश भर में सोमवार को गेहूं की औसत खुदरा कीमत 31.46 रुपये प्रति किलोग्राम और आटे की कीमत 37.30 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई, जो पिछले साल की कीमतों के ही आसपास स्थिर है.

वैश्विक बाजार पर क्या होगा असर?
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गेहूं उत्पादक देश भारत का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण ब्लैक सी क्षेत्र से वैश्विक आपूर्ति बाधित हो रही है. बंदरगाहों पर हमलों के कारण वैश्विक बाजार में अनाज की आपूर्ति कम हो गई है और एशिया व अफ्रीका के कई आयातक देश (जैसे मिस्र और इंडोनेशिया) नए वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर रहे हैं. ऐसे में भारतीय गेहूं के निर्यात से वैश्विक बाजार की तंगी कुछ कम हो सकती है और एशिया, अफ्रीका व मध्य पूर्व के देशों को आयात का एक बेहतर विकल्प मिल सकता है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत के निर्यात की मात्रा इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय गेहूं की कीमतें कितनी प्रतिस्पर्धी रहती हैं.
2022 में क्यों लगा था प्रतिबंध?
फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले के बाद वैश्विक बाजार में गेहूं की कीमतें 14 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं. इस दौरान भारतीय गेहूं की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अचानक बहुत बढ़ गई, जिससे घरेलू बाजार में गेहूं और आटे की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक का उछाल आ गया था. देश में ईंधन की बढ़ती कीमतों और भीषण गर्मी (हीटवेव) से फसल को हुए नुकसान के चलते भारत सरकार ने खाद्य सुरक्षा और महंगाई पर काबू पाने के लिए मई 2022 में गेहूं के निर्यात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था.
2 thoughts on “भारत ने गेहूं के निर्यात से हटाया 4 साल पुराना प्रतिबंध, किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा फैसला”
Comments are closed.