केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने केंद्रीय बजट 2026-27 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए घोषित प्रमुख योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में जिला अस्पतालों में आपातकालीन एवं आघात देखभाल, स्वास्थ्य कार्यबल, मानसिक स्वास्थ्य, दवा नियमन, क्लिनिकल रिसर्च और मेडिकल वैल्यू टूरिज्म से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा हुई। मंत्री ने तय समयसीमा में योजनाओं को जमीन पर उतारने और उनके परिणामों की नियमित निगरानी के निर्देश दिए।
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पहले चरण में 160 जिला अस्पतालों पर फोकस
देश के 613 जिला अस्पतालों को मरीजों की संख्या, उपलब्ध ढांचे और तैयारियों के आधार पर तीन चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में 160 जिला अस्पतालों को चुना गया है, जिन्हें मार्च 2027 तक मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। दूसरे चरण में 203 और तीसरे चरण में शेष 250 अस्पताल शामिल होंगे। इन अस्पतालों में आपातकालीन एवं आघात देखभाल की क्षमता 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना है। इसके लिए बुनियादी ढांचे, दवाओं, जांच सुविधाओं, मानव संसाधन और डिजिटल व्यवस्था का आकलन किया जा चुका है।
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1.5 लाख केयरगिवर्स को मिलेगा प्रशिक्षण
स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशिक्षित मानव संसाधन बढ़ाने के लिए अगले वर्ष 1.5 लाख बहुकुशल केयरगिवर्स को NSQF के अनुरूप प्रशिक्षण देने की पहल शुरू हो चुकी है। प्रशिक्षण में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ योग तथा चिकित्सा एवं सहायक उपकरणों के संचालन जैसे विषय शामिल हैं। पहले बैच का प्रशिक्षण भी पूरा हो चुका है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय मिलकर इसे देशभर में विस्तार देने पर काम कर रहे हैं।
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मानसिक स्वास्थ्य और रिसर्च पर भी बढ़ा जोर
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए प्रस्तावित NIMHANS-II में 1,000 बिस्तरों की क्षमता रखने की योजना है। वहीं रांची के केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (CIP) और तेजपुर के LGBRIMH को क्षेत्रीय शीर्ष संस्थानों के रूप में मजबूत किया जाएगा। दोनों संस्थानों में मनोचिकित्सा, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, शोध और प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार की योजना है। दूसरी ओर, बायोफार्मा शक्ति के तहत 1,000 से अधिक मान्यताप्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइटों का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम चल रहा है। प्रस्तावित 500 करोड़ रुपये की पहल में हब-एंड-स्पोक नेटवर्क, डिजिटल सिस्टम और केंद्रीय परीक्षण सुविधा एजेंसी जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। साथ ही पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों के जरिये चिकित्सा, शोध, निदान, उपचार के बाद की देखभाल और मेडिकल वैल्यू टूरिज्म को एक साथ जोड़ने की योजना है।
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दवा नियमन से लेकर मेडिकल टूरिज्म तक तैयारी
बैठक में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) को मजबूत करने की योजना की भी समीक्षा हुई। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक विशेषज्ञता और नियामक क्षमता बढ़ाकर वैश्विक मानकों तथा अनुमोदन की समयसीमा के अनुरूप व्यवस्था तैयार करना है। वहीं मेडिकल वैल्यू टूरिज्म के लिए राज्यों के सहयोग से पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र विकसित करने का प्रस्ताव है, जिसमें आयुष, निदान, पुनर्वास और चिकित्सा शिक्षा जैसी सुविधाओं को एक साथ रखा जाएगा। मंत्री ने कहा कि बजट में घोषित योजनाएं अलग-अलग नहीं हैं। जिला अस्पताल मजबूत होने पर आपातकालीन सेवाएं बेहतर होंगी, प्रशिक्षित केयरगिवर्स से मानव संसाधन की कमी कम होगी और मानसिक स्वास्थ्य व क्लिनिकल रिसर्च के लिए नई संस्थागत क्षमता तैयार होगी। इसलिए मंत्रालयों, राज्यों और संबंधित संस्थानों के बीच लगातार समन्वय के साथ स्पष्ट लक्ष्य और मापने योग्य परिणाम तय करना जरूरी है।