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CII के समिट में प्याज की बढ़ती कीमतों पर बोले शिवराज सिंह, किसानों को मिलेगा उनकी उपज का सही मूल्य

देश में कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में किसानों की भागीदारी को मजबूत करने पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जोर दिया है. भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के ‘ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी समिट’ में केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारत खाद्य सुरक्षा के मामले में दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रह सकता. पश्चिम एशिया के संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी वैश्विक अनिश्चितताओं का हवाला देते हुए उन्होंने जोर दिया कि टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) केवल एक पर्यावरणीय विषय नहीं है, बल्कि यह आर्थिक, सामाजिक, खाद्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रमुख एजेंडा है.

बढ़ा है कृषि उत्पादन

इस दौरान कृषि मंत्री ने कहा कि देश ने कृषि उत्पादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक वृद्धि की है. देश में कुल फसल उत्पादन वर्ष 2014-15 के 252 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 376 मिलियन टन तक पहुंच गया है. कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में देश का आर्थिक परिदृश्य बदलने की अपार क्षमता है और भारत आने वाले वर्षों में “दुनिया का खाद्य कटोरा” बन सकता है. शिवराज सिंह चौहान ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिए जाने की बात करते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग का अगर सही प्रबंधन नहीं किया गया तो मिट्टी की उपजाऊ क्षमता समाप्त हो जाएगी. उन्होंने मृदा स्वास्थ्य (Soil Health), जल संरक्षण, जैविक व प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि और जलवायु-अनुकूल तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया. साथ ही, दलहन (दालों) की खेती को बढ़ाने की वकालत की ताकि मिट्टी में नाइट्रोजन की प्राकृतिक पूर्ति हो सके और आयात पर निर्भरता कम हो सके.

किसानों का हक बिचौलियें खा रहे हैं

देश में प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर उन्होंने कहा कि किसानों का सीधा लाभ बिचौलिया ले जाते हैं. जबकि देश में प्याज की उपज बढ़ी है. उन्होंने कहा कि सरकार खेत की कीमत (Farm-gate price) और उपभोक्ता मूल्य के बीच के बड़े अंतर को कम करने तथा किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य दिलाने के लिए एक विशेष तंत्र तैयार कर रही है. किसानों से सीधे संवाद (जैसे Kharif 2025 के 15-दिवसीय अभियान) का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों को किसानों की वास्तविक समस्याओं (जैसे फसलों की शेल्फ-लाइफ बढ़ाना और कीट प्रबंधन) को ध्यान में रखकर मांग-आधारित अनुसंधान (Demand-driven research) करना चाहिए.

उद्योग और निजी क्षेत्र के लिए 5-सूत्रीय फॉर्मूला

कृषि मंत्री ने CII और उद्योग जगत के सामने समावेशी कृषि और ग्रामीण विकास के लिए 5 प्रमुख अपेक्षाएं रखीं. उन्होंने उद्योग जगत से अपील करते हुए कहा कि उद्योग जगत प्रयोगशालाओं के अनुसंधान और नई कृषि प्रौद्योगिकियों को सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाने में मदद करें. किसानों को संकटकालीन बिक्री (Distress sales) से बचाने, उपज के बदले वित्त उपलब्ध कराने और मूल्य श्रृंखला में भागीदार बनाने की व्यवस्था की जाए. साथ ही कहा कि कोल्ड चेन, सौर ऊर्जा से चलने वाली सिंचाई, सौर भंडारण, कुशल लॉजिस्टिक्स और कम कार्बन वाले प्रसंस्करण में निवेश बढ़ाया जाए. ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाकर, महिला स्व-सहायता समूहों का विस्तार कर स्थानीय स्तर पर रोज़गार पैदा किए जाएं. कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का इस्तेमाल केवल दान देने के बजाय मृदा प्रयोगशालाओं, जल संरक्षण, किसान प्रशिक्षण और डिजिटल कृषि जैसे क्षमता निर्माण कार्यों में किया जाए.

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