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कम बारिश के बीच खरीफ बुवाई 96% तक पहुंची, दालों का रकबा बढ़ा

भारत में खरीफ सीजन के लिए खरीफ की बुवाई का समय अब लगभग खत्म हो चुका है. कृषि मंत्रालय की साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में चालू खरीफ सीजन के लिए फसलों की बुवाई अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. देश के किसानों ने कुल सामान्य खरीफ क्षेत्र (1,104.46 लाख हेक्टेयर) के लगभग 96 प्रतिशत हिस्से पर फसलों की बुवाई पूरी कर ली है. 15 से 21 अगस्त के बीच बुवाई की रफ्तार में जबरदस्त तेजी आई, जिसके कारण साल दर साल का अंतर जो 7 अगस्त तक 2% था, वह अब घटकर केवल 0.3 प्रतिशत रह गया है. इस सप्ताह के दौरान करीब 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई की गई, जो पिछले साल के इसी हफ्ते के आंकड़े (35 लाख हेक्टेयर) से अधिक है. 21 अगस्त 2026 तक देश में कुल 1,056.7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान यह आंकड़ा 1,072.77 लाख हेक्टेयर था.

मुख्य फसलों की बुवाई का अपडेट

भले ही इस साल बुवाई के क्षेत्र का आंकड़ा 96 प्रतिशत पहुंच गया है. लेकिन इसके बावजूद इस बार धान के बुवाई क्षेत्र में कमी आई है. खरीफ सीजन की सबसे मुख्य फसल धान के बुवाई क्षेत्र में 3.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले साल के 418.29 लाख हेक्टेयर से घटकर 405.10 लाख हेक्टेयर रह गया है. रकबे में यह कमी मुख्य रूप से कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में कम बुवाई के कारण आई है. सरकार ने खरीफ 2026 के लिए 123.15 मिलियन टन चावल उत्पादन का लक्ष्य रखा है. दालों की बुवाई के आंकड़े पिछले साल की तुलना में बेहतर हैं और यह 112.14 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 113.63 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गए हैं. दालों में उड़द (24.38 लाख हेक्टेयर) और अरहर (43.86 लाख हेक्टेयर) की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, जबकि मूंग का रकबा थोड़ा घटकर 32.68 लाख हेक्टेयर दर्ज हुआ है, वही तिलहनी फसलों का कुल क्षेत्रफल 188.37 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल के लगभग बराबर है.मूंगफली का रकबा बढ़कर 48.79 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि सोयाबीन का रकबा थोड़ी गिरावट के साथ 121.35 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया.

 

मोचा अनाज का रकबा बढ़ा

मोटा अनाज की बात करें तो इस श्रेणी में बुवाई 1.9 प्रतिशत कम होकर 176.36 लाख हेक्टेयर रही. हालांकि ज्वार (13.41 लाख हेक्टेयर) और बाजरा (64.68 लाख हेक्टेयर) की बुवाई में सुधार दिखा है, पर रागी और मक्का का रकबा पिछले साल की तुलना में घट गया है. कपास की बुवाई मामूली गिरावट के साथ 108.45 लाख हेक्टेयर रही. गन्ने का रकबा पिछले साल के 58.87 लाख हेक्टेयर से थोड़ा घटकर 58.44 लाख हेक्टेयर दर्ज हुआ है, जिसमें बिहार, उत्तराखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में मुख्य रूप से कमी आई है. दूसरी ओर, जूट और मेस्ता का रकबा पिछले साल से बढ़कर 6.34 लाख हेक्टेयर हो गया है.

मानसून ने किया प्रभावित

इस साल मानसूनी बारिश के असमान वितरण ने बुवाई की रफ्तार को प्रभावित किया है. जहां जून महीने में बारिश में 35% की बड़ी कमी थी और जुलाई में 1% की मामूली बढ़त दर्ज की गई, वहीं 1 से 23 अगस्त के बीच बारिश सामान्य से 16% कम रही. जून से 24 अगस्त के बीच कुल मानसून सामान्य से 13% कम रहा है, जिसके कारण देश के 741 जिलों में से 360 जिलों में 20% या उससे अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई है. तमाम चुनौतियों के बावजूद, सरकार ने चालू खरीफ सीजन के लिए कुल 176.16 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है, जिसमें 8.4 मिलियन टन दालें, 31.04 मिलियन टन मक्का और 13.56 मिलियन टन मोटे अनाज का उत्पादन शामिल है.

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