Skip to main content

Panchayat Darpan

|

झारखंड के हर जिले की 5 पंचायतों को ड्रॉपआउट मुक्त बनाने की तैयारी, 6 से 18 साल के हर बच्चे की होगी निगरानी

झारखंड में स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और बच्चों के ड्रॉपआउट को रोकने के लिए पंचायत स्तर पर विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए जीरो पंचायत ड्रॉपआउट योजना लागू करने की तैयारी है। योजना के तहत पंचायत को इकाई मानकर 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे की शैक्षणिक स्थिति की जानकारी जुटायी जाएगी। पहले चरण में राज्य के सभी जिलों की पांच-पांच पंचायतों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। इन पंचायतों में योजना के क्रियान्वयन और निगरानी के अनुभव के आधार पर आगे इसका विस्तार अन्य पंचायतों में किया जा सकता है। योजना में केवल बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने पर जोर नहीं रहेगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि नामांकन के बाद बच्चे नियमित रूप से स्कूल जा रहे हैं या नहीं। स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान, उनके पढ़ाई छोड़ने के कारणों की पड़ताल और दोबारा नामांकन कराने की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। लगातार 30 कार्यदिवस तक स्कूल से अनुपस्थित रहने वाले बच्चे को ड्रॉपआउट की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे बच्चों की स्थिति की जानकारी लेकर उनकी परिस्थितियों के अनुसार दोबारा स्कूल से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

इसे भी पढ़ें : कल तक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और सुधारने का मौका, 19 अक्टूबर को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची

घर-घर सर्वे से होगी बच्चों की पहचान

स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान के लिए हाउसहोल्ड सर्वे को योजना का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। इसके तहत घर-घर जाकर यह जानकारी जुटायी जाएगी कि परिवार में 6 से 18 वर्ष की आयु के कितने बच्चे हैं, उनमें से कितने स्कूल में नामांकित हैं, कितने नियमित रूप से विद्यालय जा रहे हैं और कितने शिक्षा व्यवस्था से बाहर हैं। बच्चों के स्कूल छोड़ने के पीछे आर्थिक परेशानी, पारिवारिक जिम्मेदारी, पलायन और पढ़ाई में रुचि की कमी जैसे कारणों की भी पड़ताल की जाएगी। सर्वे के आंकड़ों की शुद्धता को योजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी बीच शिक्षा विभाग सर्वे और उसकी निगरानी में लापरवाही को लेकर सख्ती भी कर रहा है। हाल में कथित लापरवाही के मामले में 2470 शिक्षकों और 56 अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर वेतन रोकने की चेतावनी भी दी गयी है। विभाग की कोशिश है कि सर्वे में किसी बच्चे का नाम छूटे नहीं और उसकी वास्तविक शैक्षणिक स्थिति सामने आये। पंचायत स्तर पर तैयार आंकड़ों का नियमित सत्यापन कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि स्कूल से बाहर रहने वाला कोई बच्चा व्यवस्था की निगरानी से बाहर न हो।

इसे भी पढ़ें : सम्मान के साथ मनाई गई पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती, राम कुमार दूबे ने किया माल्यार्पण

14 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए ओपन स्कूलिंग

लंबे समय से स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों को उनकी उम्र और शैक्षणिक स्तर के अनुसार दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए अलग-अलग विकल्प अपनाये जाएंगे। 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों के लिए राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) के माध्यम से ओपन स्कूलिंग का विकल्प उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें कौशल विकास से जोड़ने की भी कोशिश होगी। कम उम्र में पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को सीधे उनकी वर्तमान आयु के अनुरूप कक्षा में शामिल करना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे बच्चों के लिए सेतु पाठ्यक्रम, सेतु गाइड केंद्र और आवासीय ब्रिज कोर्स की व्यवस्था की जा रही है। इन केंद्रों पर बच्चों को उनके सीखने के स्तर के अनुसार विशेष शिक्षा देकर नियमित कक्षाओं में शामिल होने के लिए तैयार किया जाएगा। हालांकि, योजना की सफलता के सामने शिक्षकों की कमी और बच्चों की नियमित उपस्थिति बड़ी चुनौती है। राज्य में बड़ी संख्या में एकल शिक्षक विद्यालय संचालित होने और करीब 99,565 शिक्षक पद रिक्त होने की स्थिति में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में केवल नामांकन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था मजबूत करने, बच्चों की नियमित उपस्थिति पर निगरानी रखने और ड्रॉपआउट के कारणों का समय पर समाधान करने से ही जीरो पंचायत ड्रॉपआउट योजना के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा।