देश की कृषि और किसानों को नई ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए प्रोजेक्ट प्रगति की शुरुआत की गई है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय स्तर पर ‘प्रगति’ (PRAGATI – Promoting Regenerative Agriculture, Growth, Agri-Entrepreneurship and Transformative Innovation) पहल का शुभारंभ किया है. इसका मुख्य उद्देश्य 20,000 ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित कृषि-उद्यमी (Agri-Entrepreneurs) बनाकर देश के 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आय, उत्पादकता और आजीविका में सुधार लाना है. यह योजना शुरुआती चरण में 8 प्रमुख कृषि राज्यों—मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड में लागू की जा रही है. मार्च 2015 में शुरू किया गया PRAGATI (Pro-Active Governance and Timely Implementation) एक डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म है, जिसने 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं और हाल ही में इसकी 50वीं समीक्षा बैठक आयोजित की गई है. इस मंच के माध्यम से ₹85 लाख करोड़ से अधिक मूल्य की 3,300 से अधिक राष्ट्रीय ढांचागत और सामाजिक परियोजनाओं की सीधी निगरानी कर अंतर-मंत्रालयी रुकावटों को दूर किया गया है. जल शक्ति मंत्रालय की कई महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाएं (जैसे महाराष्ट्र की बेम्बला सिंचाई परियोजना) इसी मंच की सीधी निगरानी के कारण समयबद्ध तरीके से पूरी होकर चालू की गई हैं.
देश के किसानों के लिए यह कैसे फायदेमंद है?
‘प्रगति’ प्रोजेक्ट देश के किसानों के लिए निम्नलिखित तरीकों से अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है. प्रत्येक गांव में प्रशिक्षित कृषि-उद्यमी और बड़ी संख्या में ‘कृषि सखियाँ’ तैनात होंगी, जो किसानों के लिए तकनीकी सलाह और सेवाओं का एक केंद्र बनेंगी. किसानों को खेत पर ही मृदा परीक्षण (Soil Testing), वैज्ञानिक सलाह, आधुनिक कृषि मशीनरी किराये पर लेने, वित्तीय साक्षरता और औपचारिक बैंकिंग तक पहुंच की सुविधाएं मिलेंगी, जिससे खेती की लागत घटेगी. योजना के अंतर्गत किसानों की आय में न्यूनतम 30% वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही धान, मक्का और आलू जैसी मुख्य फसलों की उत्पादकता में 15 से 20 प्रतिशत बढ़ोतरी का लक्ष्य है. ‘प्रगति’ सुशासन मंच के जरिए लंबे समय से अटकी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा कर लाखों हेक्टेयर भूमि तक पानी पहुंचाया गया है, जिससे किसानों को सूखे का मुकाबला करने में मदद मिली है.

कृषि क्षेत्र में यह कैसे किसानों की मदद करेगा?
कृषि क्षेत्र को आधुनिक और टिकाऊ बनाने के लिए ‘प्रगति’ बहु-आयामी रणनीति पर काम कर रहा है.केवल पारंपरिक खेती के बजाय किसानों को बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और एग्री-प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों से जोड़कर अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं. कम से कम 20% किसानों को पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे मिट्टी की सेहत सुधरे और जलवायु परिवर्तन के बीच भी टिकाऊ उपज मिल सके. किसानों को ड्रोन आधारित सेवाओं, AI टूल्स, डिजिटल परामर्श और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से जोड़ा जा रहा है. इसे भारत में निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाला सबसे बड़ा कृषि-उद्यमिता कार्यक्रम माना जा रहा है. इसमें पेप्सिको फाउंडेशन, एसबीआई फाउंडेशन, गेट्स फाउंडेशन, आईडीएच, हीफर इंटरनेशनल, एनवायरनमेंटल डिफेंस फंड (EDF), एईजीएफ (AEGF) और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRIF) जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं मिलकर किसानों को प्रशिक्षण और बाजार संपर्क (Market Linkage) प्रदान कर रही हैं.
विकसित भारत के लिए यह कितना जरूरी है?
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, “विकसित भारत का सपना विकसित कृषि और समृद्ध गांवों के बिना संभव नहीं है”.भारत की लगभग 46.1 प्रतिशत कार्यबल (Workforce) अपनी आजीविका के लिए कृषि और संबद्ध क्षेत्रों पर निर्भर है. कृषि और संबद्ध क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन (GVA) 2014-15 के ₹20.94 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹52.08 लाख करोड़ अनुमानित है. जब तक ग्रामीण युवा उद्यमी नहीं बनेंगे और छोटे एवं सीमांत किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि नहीं होगी, तब तक देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत नहीं हो सकती. ‘प्रगति’ का पारदर्शी और परिणाम-केंद्रित गवर्नेंस मॉडल समयबद्ध क्रियान्वयन, केंद्र-राज्य सहयोग (Cooperative Federalism) और ग्रामीण सशक्तिकरण का नया ढांचा खड़ा करता है, जो विकसित भारत@2047 के संकल्प को पूरा करने की मुख्य कुंजी है.