कृषि मंत्री, झारखंड सरकार शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि परिसीमन के नाम पर आदिवासी समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी या आरक्षित सीटों में किसी भी तरह की कटौती स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपने राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहा है।
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27 अगस्त के धरना-प्रदर्शन और 30 अगस्त की रैली की तैयारी
शिल्पी नेहा तिर्की ने सोमवार को मांडर विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में 27 अगस्त को सभी जिला मुख्यालयों पर चंदा चोरी और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के विरोध में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन तथा 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में होने वाली आदिवासी एकता महाजुटान रैली को लेकर चर्चा हुई। संगठन को पंचायत और बूथ स्तर तक सक्रिय करने तथा अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई गई।
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राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बताया अधिकारों की मजबूत आवाज
शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक प्रतिनिधित्व ही अधिकारों की सबसे मजबूत आवाज है। इसलिए आदिवासी समाज के प्रतिनिधित्व को कमजोर करने वाली किसी भी कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से गांव-गांव और बूथ स्तर तक जनसंपर्क अभियान चलाने और दोनों कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए जुटने का आह्वान किया।
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जल, जंगल और जमीन से जुड़ी पहचान
उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान जल, जंगल और जमीन से जुड़ी है और आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार परिसीमन केवल सीटों की सीमाएं तय करने की प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसका असर राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से आदिवासी क्षेत्रों में आरक्षण और प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रही आशंकाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। बैठक में कांग्रेस के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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