झारखंड सरकार की सोना-सोबरन धोती-साड़ी योजना प्रशासनिक लेटलतीफी और टेंडर प्रक्रिया की पेचीदगी के कारण बैकलॉग में चल रही है। गरीब और खाद्य सुरक्षा योजना से आच्छादित परिवारों को साल में दो बार मात्र 10 रुपये में धोती, साड़ी या लुंगी उपलब्ध कराने की यह योजना समय पर धरातल पर नहीं उतर पा रही है। स्थिति यह है कि वर्ष 2025 के पहले हाफ का वितरण भी अब तक पूरा नहीं हुआ है।
जबकि अब तक पिछले वर्ष के दूसरे हाफ और वर्ष 2026 के पहले हाफ का वितरण भी हो जाना चाहिए था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 67,57,528 पंजीकृत लाभुक परिवार हैं। इनमें से अब तक 56,41,792 परिवारों को ही पिछले वर्ष के पहले हाफ का लाभ मिल पाया है। यानी 11,15,736 लाभुक परिवार अब भी पिछले साल की अपनी पहली साड़ी, धोती या लुंगी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार ने पहले हाफ के वितरण को शत-प्रतिशत पूरा करने के लिए 31 अगस्त की अंतिम समय-सीमा तय की है।
बड़े जिलों में सबसे ज्यादा पिछड़ रहा वितरण
जिलों के आंकड़ों के अनुसार, बड़े और घनी आबादी वाले जिलों में योजना का क्रियान्वयन सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। वितरण नहीं होने के मामले में पूर्वी सिंहभूम सबसे ऊपर है। यहां 1,18,134 गरीब परिवारों को अब तक योजना का लाभ नहीं मिल सका है। इसके बाद धनबाद में 1,05,596 और राजधानी रांची में 1,04,791 लाभुक वंचित हैं। पश्चिमी सिंहभूम में 98,729 और गिरिडीह में 70,634 परिवारों को अभी कपड़े मिलने का इंतजार है।
इसके अलावा कई अन्य जिलों में भी हजारों लाभुक बैकलॉग की वजह से प्रभावित हैं। उपलब्ध आंकड़ों में बोकारो के 30,601, चतरा के 31,465, देवघर के 30,384, दुमका के 60,003, गढ़वा के 47,507, गोड्डा के 46,031, गुमला के 20,840, हजारीबाग के 60,265, जामताड़ा के 28,302, खूंटी के 12,240, कोडरमा के 37,109, लातेहार के 13,818 और लोहरदगा के 16,089 लाभुकों का वितरण लंबित है।

31 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य
आंकड़ों से साफ है कि योजना के तहत लाभुकों की संख्या बड़ी होने के बावजूद वितरण व्यवस्था समय पर गति नहीं पकड़ पा रही है। पूर्वी सिंहभूम और धनबाद की स्थिति सबसे खराब है, जबकि रांची जैसे राजधानी जिले में भी एक लाख से अधिक परिवार लाभ से वंचित हैं। उपलब्ध आंकड़ों में पलामू में 17,362, रामगढ़ में 15,425, सरायकेला-खरसावां में 21,714, साहिबगंज में 1,04,428 और सिमडेगा में 10,743 लाभुकों के वितरण का आंकड़ा सामने आया है।
सरकार ने 31 अगस्त तक पिछले साल के पहले हाफ का शत-प्रतिशत वितरण पूरा करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन टेंडर प्रक्रिया की जटिलता, आपूर्ति में देरी और प्रशासनिक स्तर पर धीमी गति के कारण लक्ष्य हासिल करना चुनौती बना हुआ है। योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को वर्ष में दो बार नाममात्र की कीमत पर कपड़ा उपलब्ध कराना है, लेकिन बैकलॉग खत्म नहीं होने से हजारों परिवार योजना के लाभ का इंतजार कर रहे हैं।
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