देश में सूखे के संकट के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का दौर शुरू हो गया है। गुजरात और राजस्थान से मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है. साल 2026 में भारत को मानसून की बेरुखी का सामना करना पड़ा । अल-नीनो के प्रभाव के कारण देश में इस बार सामान्य से कम बारिश हुई, जिसके कारण 52 प्रतिशत से अधिक का भूभाग सूखा रहा या सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है. बारिश में कमी सितंबर महीने में भी देखी गई जिसके कारण पिछले एक महीने के दौरान सूखा प्रभावित क्षेत्र का आकंड़ा 38.9 से बढ़कर 52.5 हो गया. इस तरह से लगभग 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. जलवायु वैज्ञानिकों के अनुसार, भौगोलिक फैलाव और बारिश के बीच लंबे सूखे का दौर (dry spells) के कारण यह स्थिति 2015-16 के सूखे से भी अधिक व्यापक और गंभीर नजर आ रही है. वहीं, प्रशांत महासागर में एल नीनो (El Niño) मजबूत स्थिति में है और इसके फरवरी 2027 तक बने रहने का अनुमान जताया गया है.
सामान्य से कम हुई बारिश
देश में वर्षा की कमी का अंदाजा लगाने के लिए यह आंकड़े काफी है जो एक जून से 22 सितंबर तक के बारिश को दिखा रहे हैं। इस दौरान देश में 706.9 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य (832.4 मिमी) से 15% कम है। क्षेत्रीय आंकड़ों की बात करें तो देश के 41% हिस्से में मौसमी बारिश की कमी रही है । पश्चिमी भारत का लगभग 79% और दक्षिण भारत का 67% क्षेत्र सूखे के प्रभाव में है ।इसके अलावा, उत्तर-पूर्व में 62%, उत्तर-पश्चिम में 47% और पूर्वी भारत में 42% हिस्सा प्रभावित है । विशिष्ट क्षेत्रों की बात करें तो रायलसीमा में सामान्य से 43% कम, तटीय आंध्र प्रदेश में 37% कम, मराठवाड़ा में 36% कम, कर्नाटक के आंतरिक हिस्सों में 32% कम और केरल में 28% कम बारिश हुई है ।कृषि और फसलों पर संकट बारिश में लगातार रुकावट और शुष्क अवधियों के कारण मिट्टी की नमी (soil moisture) तेजी से घट रही है

कृषि मंत्रालय के आंकड़ें
मानसून की कमी और बारिश की अनियमितता का सीधा असर खरीफ सीजन के दौरान फसलों की रोपाई पर पड़ा है। कृषि मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार 11 सितंबर तक खरीफ फसलों का कुल रकबा 1,096.49 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल से 16.05 लाख हेक्टेयर कम है । सर्वाधिक गिरावट धान (चावल) की बुवाई में आई है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 17 लाख हेक्टेयर घट गया है। धान के रकबे में सबसे ज्यादा कमी कर्नाटक (4.54 लाख हेक्टेयर), तेलंगाना (4.46 लाख हेक्टेयर), आंध्र प्रदेश (1.90 लाख हेक्टेयर), मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में दर्ज की गई है।
रबी उत्पादन पर होगा असर
बारिश में कमी और लंबे सूखे का असर रबी फसलों की बुवाई पर भी पड़ने वाला है। खरीफ सीजन में पैदावार कम होने का संकट अब रबी सीजन पर भी मंडरा रहा है । क्योंकि लंबे सूखे के कारण जमीन की नमी खत्म हो रही है और नदियों और तालाबों का पानी भी जल्द सूख जाएगा। नदियों और तालाब में जलभराव नहीं होने के कारण रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता कम हो जाएगी । देश का 55-60% कृषि क्षेत्र बारिश पर निर्भर है, जिससे यह स्थिति किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गई है।
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