ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुरक्षा, स्वच्छता और आजीविका को एक साथ मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाओं के बीच समन्वय की पहल की है। जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 और स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी) 2.0 के कार्यों को विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 के तहत एकीकृत करने का आग्रह किया है।
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ग्राम पंचायत स्तर पर एक साथ बनेगी योजना
वीबी-जी राम जी अधिनियम में जल सुरक्षा को चार प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। वहीं, 10 मार्च 2026 को स्वीकृत जेजेएम 2.0 में पेयजल स्रोतों की स्थिरता, भूजल पुनर्भरण और अपशिष्ट जल प्रबंधन को महत्व दिया गया है। एसबीएम-जी 2.0 में ठोस और तरल कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर है। सरकार का प्रयास है कि इन योजनाओं के अलग-अलग कामों को ग्राम पंचायत स्तर की योजनाओं में जोड़कर एक साथ लागू किया जाए। इससे एक ही गांव में जल संरक्षण, पेयजल व्यवस्था और स्वच्छता से जुड़े कामों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकेगा।

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जल सुरक्षा को मिलेगी प्राथमिकता
राज्यों से कहा गया है कि ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (वीजीपीपी) में जल सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए और इन्हें जेजेएम 2.0 तथा एसबीएम-जी 2.0 की ग्राम कार्य योजनाओं से तकनीकी रूप से जोड़ा जाए। इसके लिए ग्रामीण जल आपूर्ति अथवा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के प्रभारी अधिकारी को राज्य स्तरीय संचालन समिति में शामिल करने तथा संबंधित विभागों में नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा गया है। उदाहरण के तौर पर किसी गांव में यदि पेयजल स्रोत को मजबूत करने का काम हो रहा है, तो उसी योजना के साथ भूजल पुनर्भरण और इस्तेमाल किए गए पानी के प्रबंधन का काम भी जोड़ा जा सकता है।
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भू-टैगिंग और जल बजट से होगी निगरानी
अभिसरण के तहत जेजेएम 2.0 और एसबीएम-जी 2.0 के कार्यों तथा अन्य संबंधित परिसंपत्तियों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक पर दर्ज और भू-टैग करने को कहा गया है। राज्यों को युक्तधारा जैसे भू-स्थानिक नियोजन उपकरणों के साथ जल बजट और जलभूवैज्ञानिक आकलन का भी इस्तेमाल करना होगा। इससे गांव में उपलब्ध जल स्रोत, उसकी जरूरत और किए जा रहे विकास कार्यों की तस्वीर एक जगह सामने लाने में मदद मिलेगी।

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पेयजल से आगे आजीविका तक पहुंचेगा असर
इस पहल का उद्देश्य केवल पानी और स्वच्छता से जुड़े कामों को जोड़ना नहीं है। सरकार चाहती है कि वीबी-जी राम जी, जेजेएम 2.0 और एसबीएम-जी 2.0 के तहत होने वाला निवेश मिलकर सतत पेयजल सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करे। जल सुरक्षा बेहतर होने से कृषि उत्पादकता और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। इसके लिए पेयजल एवं स्वच्छता, ग्रामीण विकास, पंचायती राज और अन्य संबंधित विभागों के बीच राज्य से लेकर जिला और ग्राम पंचायत स्तर तक समन्वय को जरूरी माना गया है। यही समन्वित व्यवस्था विकसित भारत @2047 के ग्रामीण विकास लक्ष्य को जमीन पर उतारने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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