नई दिल्ली। किसानों तक आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, कौशल और कृषि आधारित उद्यमिता के अवसर पहुंचाने के लिए देश के कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) को मजबूत करने की तैयारी तेज की गई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों की भागीदारी बढ़ाने को लेकर कार्ययोजना की समीक्षा की। इसमें मार्च 2027 तक प्राथमिकता वाले 300 KVK के बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स के उन्नयन तथा दिसंबर 2028 तक सभी KVK में इनक्यूबेशन-सह-कौशल केंद्र स्थापित करने पर मुख्य रूप से चर्चा हुई।
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चार राज्यों ने DPR सौंपी, बाकी भी तैयारी में
समीक्षा बैठक में राज्यों से समय पर वित्तीय और संस्थागत सहयोग देने को कहा गया। कई राज्यों ने अपने राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और छत्तीसगढ़ ने प्राथमिकता वाले KVK के उन्नयन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) प्रस्तुत की है। अन्य राज्य भी तैयारी और क्रियान्वयन के अलग-अलग चरण में हैं। दिसंबर 2028 तक सभी KVK में इनक्यूबेशन-सह-कौशल केंद्र बनाने के लिए कृषि आधारित उद्यमों, तकनीकी संस्थानों और जिले की कृषि संभावनाओं के साथ केंद्रों का मैपिंग किया जा रहा है।
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KVK कर्मचारियों और फंडिंग पर भी फोकस
बैठक में KVK कर्मचारियों की स्थिति में सुधार का मुद्दा भी उठा। कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पदोन्नति से जुड़े प्रस्तावों को व्यय विभाग से मंजूरी मिल चुकी है। राज्यों से खाली पदों पर समय पर भर्ती करने और NPS योगदान तथा सेवानिवृत्ति लाभ में अपनी भूमिका निभाने का आग्रह किया गया। मौसमी कृषि गतिविधियों के लिए समय पर पैसा पहुंचाने पर भी जोर रहा, ताकि किसान प्रशिक्षण और प्रदर्शन सही कृषि अवधि में किए जा सकें।

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दलहन-तिलहन से लेकर PM-DKYY तक बढ़ेगी भूमिका
2026-27 में दलहन और तिलहन के लिए 24 राज्यों में 353 KVK/जिलों के माध्यम से क्लस्टर फ्रंटलाइन प्रदर्शन चल रहे हैं। 12,349 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 9,750 हेक्टेयर क्षेत्र में काम हो चुका है। बैठक में धन जारी करने में देरी, गुणवत्तापूर्ण बीजों की समय पर उपलब्धता और राज्यों के बीच समन्वय की जरूरत पर भी चर्चा हुई। PM-DKYY के तहत जिला-विशिष्ट योजनाओं को लागू करने में भी KVK की भूमिका तय की जा रही है।
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किसानों के लिए ज्ञान और रोजगार का केंद्र बनने की तैयारी
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि KVK को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल, समय पर वित्तीय सहायता, आधुनिक बुनियादी ढांचा और पर्याप्त मानव संसाधन जरूरी हैं। इसका असर गांवों में इस रूप में दिख सकता है कि किसान को तकनीक या नई फसल की जानकारी के लिए दूर जाने के बजाय स्थानीय KVK से प्रशिक्षण और सलाह मिले। इनक्यूबेशन-सह-कौशल केंद्र बनने के बाद कृषि से जुड़े छोटे उद्यम, प्रसंस्करण और ग्रामीण रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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