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झारखंड में खरीफ खेती : बीते साल से करीब 44 हजार हेक्टेयर कम जमीन पर खेती, लेकिन बीमा का क्रेज अधिक

अल नीनो के प्रभाव की आशंका के बीच झारखंड में इस साल खरीफ खेती और फसल सुरक्षा का पैटर्न बदला हुआ नजर आ रहा है। वर्ष 2026 में राज्य में खरीफ फसलों का कुल रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 44 हजार हेक्टेयर घट गया, लेकिन फसल बीमा कराने वाले खेतों का दायरा 1.90 लाख हेक्टेयर बढ़ गया है। वर्ष 2025 में 18.95 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसल की खेती हुई थी, जबकि इस साल 18.51 लाख हेक्टेयर में धान और मक्का की खेती हुई है। इसके बावजूद बीमित फसल का रकबा पिछले साल के 9.31 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस वर्ष 11.21 लाख हेक्टेयर हो गया है। खास बात यह है कि बीमा कराने वाले किसानों की संख्या में कमी आयी है। पिछले साल 14.22 लाख किसानों ने फसल बीमा कराया था, जबकि इस वर्ष करीब 13.20 लाख किसान बीमा के दायरे में आये हैं। यानी कम किसानों ने अपनी अपेक्षाकृत ज्यादा जमीन का बीमा कराया है। अधिकारियों के अनुसार, अल नीनो के कारण मौसम को लेकर बनी आशंका ने भी किसानों को अपनी फसल सुरक्षित कराने के लिए प्रेरित किया।

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22 लाख किसानों को कवर करने का था लक्ष्य

झारखंड में केंद्र और राज्य सरकार की साझेदारी से किसानों को फसल बीमा की सुविधा दी जा रही है। किसानों को महज एक रुपये प्रति हेक्टेयर के टोकन शुल्क पर फसल बीमा उपलब्ध कराया गया है। इसी वजह से राज्य में इसे बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लागू किया गया है। सहकारिता विभाग की ओर से मुख्य रूप से अगहनी धान और मक्का की फसल का बीमा कराया गया है। विभाग ने इस वर्ष करीब 22 लाख किसानों की फसल को बीमा के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा था। अब तक करीब 14 लाख किसानों की फसल का बीमा कराये जाने की बात सामने आयी है, जबकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 13.20 लाख किसानों का बीमा दर्ज हुआ है। बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 अगस्त थी और इस बार इसकी अवधि नहीं बढ़ायी गयी। बीमा योजना के तहत औसतन एक एकड़ अगहनी धान की फसल के लिए करीब 70 हजार रुपये तक का बीमा कवर रखा गया है। राज्य में बीमा का काम पांच एजेंसियों को दिया गया है। अलग-अलग प्रमंडल और जिलों में अलग-अलग एजेंसियां बीमा कार्य कर रही हैं और संबंधित क्षेत्र के अनुसार फसल का बीमा कवर निर्धारित किया जायेगा।

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अल नीनो के डर और प्रचार-प्रसार से बढ़ा बीमित रकबा

झारखंड में फसल बीमा के नोडल अधिकारी सुजीत कुमार सिंह के अनुसार, इस वर्ष किसानों के बीच अल नीनो को लेकर भी चिंता थी। शुरुआती दौर में आशंका थी कि मौसम में बदलाव के कारण आगे चलकर खेती प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसानों ने अपनी फसल को जोखिम से बचाने के लिए बीमा कराने पर अधिक जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष फसल बीमा को लेकर प्रचार-प्रसार भी पहले की तुलना में बेहतर तरीके से किया गया। बैंकों और बीमा कंपनियों का भी पूरा सहयोग मिला। इसके कारण पिछले साल की तुलना में इस बार अधिक खेतों को बीमा सुरक्षा मिल सकी। हालांकि किसानों की संख्या में कमी आयी है, लेकिन बीमित क्षेत्र बढ़ा है। अभी उपलब्ध आंकड़ों को जिला स्तरीय कमेटी के समक्ष रखा जायेगा। वहां किसानों की संख्या और बीमित खेतों के आंकड़ों का मिलान कर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जायेगी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 14.22 लाख किसानों ने अपनी फसल का बीमा कराया था, जबकि इस वर्ष यह संख्या घटकर करीब 13.20 लाख रह गयी है। इसके विपरीत बीमित रकबा 9.31 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 11.21 लाख हेक्टेयर हो गया है।