नई दिल्ली में तीन दिवसीय ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 की शुरुआत हुई, जिसमें 25 से अधिक देशों के 800 से अधिक वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, विकास संगठनों, उद्योग प्रतिनिधियों और किसानों ने हिस्सा लिया. यह सम्मेलन जलवायु परिवर्तन, जल संकट, भूमि क्षरण और कम लाभप्रदता का सामना कर रहे शुष्क क्षेत्रों के लिए व्यावहारिक समाधान खोजने पर केंद्रित है.
समारोह का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शुष्क भूमि (Drylands) को केवल एक संरचनात्मक कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. सही विज्ञान, बेहतर नीतियों और मजबूत बाजार सहायता के माध्यम से शुष्क क्षेत्र भारत, अफ्रीका और अन्य समान देशों के लिए सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं. केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि शुष्क क्षेत्रों में कृषि परिवर्तन का लक्ष्य केवल फसल की पैदावार बढ़ाना नहीं होना चाहिए, बल्कि खाद्य सुरक्षा, पोषण और किसानों की वास्तविक समृद्धि को नीति के केंद्र में रखा जाना चाहिए.
एकीकृत प्रणाली और विशेषज्ञ दृष्टिकोण
कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने ‘सिफारिशों से कार्रवाई’ और ‘साइलो से सिस्टम’ की ओर बढ़ने का आह्वान किया. ICRISAT के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि शुष्क भूमि कृषि को अधिक उत्पादक और लाभदायक बनाना आवश्यक है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले पलायन को कम किया जा सके. ICAR के पूर्व महानिदेशक डॉ. आर. एस. परोदा ने पानी की हर बूंद से अधिक आर्थिक और पोषण संबंधी मूल्य प्राप्त करने पर जोर दिया. डॉ. पंजाब सिंह ने कहा कि शुष्क भूमि कृषि प्रणालियों को टिकाऊ और लाभदायक बनाकर युवा पीढ़ी के लिए आकर्षक बनाना होगा

दक्षिण-दक्षिण सहयोग और भारत की भूमिका
सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के बीच ज्ञान और प्रौद्योगिकियों के साझाकरण (South-South Cooperation) को प्रमुखता दी गई. डॉ. त्रिलोचन महापात्र, डॉ. विलियम डी. डार और CGIAR की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सैंड्रा मिलाच ने रेखांकित किया कि भारत जलवायु-अनुकूल कृषि समाधान प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभर रहा है.
विशेष विमोचन एवं किसानों की भागीदारी
उद्घाटन सत्र के दौरान ICRISAT की 50 वर्षों की शोध यात्रा पर आधारित पुस्तक “Transforming the Drylands: The ICRISAT Journey” तथा 250 से अधिक शोध सारांशों वाली Abstract Book का विमोचन किया गया. इसके अलावा, पद्मा श्री से सम्मानित किसान भीकिया लाडकया ढिंडा सहित अन्य किसानों की उपस्थिति ने यह सुनिश्चित किया कि विकास रणनीतियों में किसानों के व्यावहारिक अनुभवों को शामिल किया जाए.