अल नीनो (El Niño) के प्रभाव से बनी सूखे जैसी स्थिति के कारण भारत में आगामी सत्र में चीनी उत्पादन में गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है. इससे दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश में आपूर्ति प्रभावित होगी और वैश्विक बाजार में भी चीनी की उपलब्धता कम हो सकती है
उत्पादन में गिरावट का अनुमान
ब्लूमबर्ग (Bloomberg) के सर्वेक्षण के अनुसार, सितंबर 2027 तक के वर्ष में भारत का कुल चीनी उत्पादन 2.9 करोड़ टन से 3.1 करोड़ टन (29 से 31 मिलियन टन) के बीच रहने का अनुमान है. इसकी तुलना में इंडियन शुगर एंड बायोएनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने चालू सत्र के लिए 3.1 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान लगाया था.
कम मानसून और वैश्विक असर
भारत में वर्तमान मानसून बारिश सामान्य से लगभग 15% कम रही है. अंतरराष्ट्रीय चीनी संगठन (ISO) के अनुसार, एशिया में अल नीनो के कारण वैश्विक स्तर पर लगभग 2.6 लाख टन चीनी की कमी (deficiency) हो सकती है. उत्पादन कम होने की आशंका से इस वर्ष न्यूयॉर्क में कच्ची चीनी (raw sugar) के वायदा भाव में लगभग 30% की तेजी आई है

सरकार की ओर से उठाए गए कदम
दुनिया के सबसे बड़े चीनी उपभोक्ता भारत ने घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए मिलों और रिफाइनरियों को शुल्क-मुक्त (duty-free) कच्ची चीनी आयात करने की अनुमति दी है. साथ ही व्यापारियों और बड़े इस्तेमालकर्ताओं के लिए स्टॉक सीमा भी तय की गई है
इथेनॉल उत्पादन पर असर
चीनी की ऊंची घरेलू कीमतें मिलों को इथेनॉल बनाने के बजाय अधिक चीनी का उत्पादन करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं.
चीनी आयात की संभावना
बफर स्टॉक को फिर से मजबूत करने के लिए भारत को अगले साल जुलाई से 20 लाख से 30 लाख टन (2 से 3 मिलियन टन) चीनी का आयात करना पड़ सकता है.
त्योहारों के मौसम में आपूर्ति पर नजर
खाद्य मंत्रालय ने चीनी मिलों को आगामी त्योहारों के दौरान कीमतें नियंत्रण में रखने और पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने का निर्देश दिया है. इसके अलावा, सरकार अब उत्पादन और आपूर्ति पर बेहतर नजर रखने के लिए मासिक आधार पर ट्रैकिंग करेगी.
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