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भारत में अल-नीनो इफैक्ट : रबी फसलों पर संकट, गेहूं-दाल-सब्जियां महंगी होने का खतरा

प्रशांत महासागर में अल-नीनो का प्रभाव मजबूत होने की आशंका ने भारत के आगामी रबी सत्र और खाद्यान्न सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट (आइआरआइ) के ताजा अध्ययन के मुताबिक, 2026 के अंत और 2027 की शुरुआत में बेहद मजबूत अल-नीनो सक्रिय हो सकता है। इससे भारत में सर्दियां सामान्य से अधिक गर्म और शुष्क रहने की आशंका है। प्रशांत महासागर में नीनो 3.4 इंडेक्स 3.0 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज हुआ है। आइआरआइ के सभी 22 मॉडलों ने मजबूत अल-नीनो की आशंका जतायी है। इसके फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना 100% और मध्य 2027 तक 61% बतायी गयी है। हालांकि, हिंद महासागर में सक्रिय पॉजिटिव आइओडी इसके असर को कुछ कम कर सकता है।

638 लाख हेक्टेयर रबी फसल पर पड़ सकता है असर

भारत सरकार ने भी इस संभावित खतरे को गंभीरता से लिया है। रबी अभियान पर राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा ने कहा कि अल-नीनो के कारण वर्षा आधारित क्षेत्रों में आगामी रबी सत्र चुनौतीपूर्ण रह सकता है और कुल खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित हो सकता है। देश में सामान्यतः करीब 638 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बुआई होती है। इनमें 300 लाख हेक्टेयर से अधिक में गेहूं, 140 लाख हेक्टेयर में दलहन, 87 लाख हेक्टेयर में तिलहन और करीब 55 लाख हेक्टेयर में मोटे अनाज बोये जाते हैं। कुछ राज्यों में जहां अतिरिक्त नमी है, वहीं कम बारिश वाले क्षेत्रों में लंबे समय तक नमी की कमी रहने की आशंका है। इससे बुआई और पैदावार दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

 

गेहूं की पैदावार घटने से आटा, दाल और सब्जियां हो सकती हैं महंगी

अल-नीनो के कारण सर्दियां गर्म रहने पर सबसे बड़ा खतरा गेहूं की फसल को है। दाना भरने के समय गेहूं को पर्याप्त ठंड की जरूरत होती है। तापमान 2-3 डिग्री सेल्सियस बढ़ने पर फसल समय से पहले पक सकती है और दाने सिकुड़ने से पैदावार 15-20% तक घट सकती है। इससे आटे की कीमत बढ़ने का खतरा है। नमी की कमी से चना और मसूर में फूल झड़ सकते हैं, जिससे दालों की कीमतों पर असर पड़ेगा। गर्म रातों के कारण आलू के कंद छोटे रह सकते हैं और मौसमी आवक प्रभावित हो सकती है। इससे सब्जियों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।

तिलहन पर भी गर्मी का असर, खाद्य तेल महंगा होने की आशंका

गर्मी बढ़ने से सरसों की फसल में माहू कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। इससे तिलहन उत्पादन घटने और खाद्य तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। अल-नीनो प्रशांत महासागर की सतह के तापमान के असामान्य रूप से बढ़ने की स्थिति है, जो वैश्विक मौसमी चक्र को प्रभावित करती है। भारत में इसका असर गर्म सर्दी और अपेक्षाकृत शुष्क मौसम के रूप में दिख सकता है। आगामी रबी सत्र में वर्षा आधारित क्षेत्रों में मिट्टी की नमी घटना उत्पादन के लिए सबसे बड़ा जोखिम माना जा रहा है। ऐसे में गेहूं, दलहन, तिलहन और सब्जियों पर असर सीधे खाद्य कीमतों और आम लोगों की थाली तक पहुंच सकता है।

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