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Panchayat Darpan

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झारखंड में सरसों की खेती को बढ़ावा देने की पहल, बाड़े गांव में किसानों के बीच बांटे गए बीज

देश को तिलहन उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है । इसके तहत देश में तिलहन की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है और किसानों की तिलहनी फसलों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है इसी के तहत रांची जिले के बुढ़मू प्रखंड अंतर्गत बाड़े गांव में रामकृष्ण मिशन आश्रम और भारतीय सरसो अनुसंधान संस्थान भरतपुर राजस्थान के द्वारा गांव में सरसों की खेती करने के लिए ग्रामीण किसानों के बीच सरसों के उन्नत किस्म की बीज का वितरण किया गया।

किसानों को दिए गए मुफ्त बीज

बाड़े गांव में 25 एकड़ जमीन में सरसों की खेती करने का लक्ष्य रखा गया है। गांव में खेती करने के लिए किसानों को आभा सरसों-1 किस्म का उन्नत बीज दिया गया। जिले के आदिवासी किसानों की जीविकोपार्जन और सरसों का उत्पादन बढ़ाने के लिए जिले में यह योजना साल 2018 से चलाई जा रही है। योजना के तहत प्रतिवर्ष 100 एकड़ के क्षेत्र में सरसों की खेती करने के लिए किसानों के बीच खाद, बीज और कृषि यंत्र निशुल्क मुहैया कराया जाता है।

100 एकड़ में खेती का लक्ष्य

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि योजना के तहत बुढ़मू प्रखंड के दो गांवों बाड़े और सिदरौल में कुल 50 एकड़ जमीन में सरसों की खेती करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा अनगड़ा प्रखंड में 25 एकड़ और मांडर प्रखंड में 25 एकड़ में सरसों की खेती करने का लक्ष्य रखा गया है। इन प्रखंडों में 100 से अधिक किसानों को सरसों आभा-1 किस्म के बीज दिए गए हैं. इसकी बुवाई एक लाइन में की जाती है।

किसानों को दी गई सरसों खेती की जानकारी

सरसों का प्रत्यरक्षण कार्यक्रम के दौरान बाड़े और सिदरौल गांव के ग्रामीण किसानों को दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ नेहा राजन ने सरसों के उन्नत खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर दोनों ही गांवों के 100 से अधिक किसान शामिल हुए. सरसों बीज वितरण कार्यक्रम में सफल बनाने में महिला मित्र कुंती देवी ने महत्वपू्र्ण भूमिका निभाई. इसके अलावा सीता देवी और सरिता देवी का भी सहयोग रहा।

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