झारखंड में अगले 5 दिन हल्की बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के अनुसार प्रतिदिन करीब 4 से 6 मिमी बारिश का पूर्वानुमान है। इस दौरान अधिकतम तापमान 32-33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26-27 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है। मौसम में नमी और बादल की स्थिति को देखते हुए किसानों को खड़ी फसलों में सिंचाई, अंतर-सस्य क्रियाओं, पौधों की सुरक्षा और खाद डालने का काम फिलहाल टालने की सलाह दी गई है। खेतों में पानी जमा नहीं होने देना जरूरी बताया गया है। कटाई के लिए तैयार उपज को सुरक्षित स्थान पर रखने और सब्जियों के पौधों को बारिश से बचाने के लिए पॉलीथिन से ढकने की सलाह भी दी गई है।
इसे भी पढ़ें : अल नीनो के कारण भारत में चीनी उत्पादन में गिरावट की आशंका, वैश्विक बाजार में बढ़ सकती है तंगी
धान में तना छेदक का खतरा, समय पर करें निगरानी
बारिश और लगातार बादल रहने से धान की फसल में रोग और कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। खासकर बाली निकलने की अवस्था वाले धान में तना छेदक का संक्रमण होने की आशंका जताई गई है। किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर नियंत्रण के उपाय करने को कहा गया है। बुलेटिन में तना छेदक के नियंत्रण के लिए फ्लूबेंडियामाइड 48 एससी की 1 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग करने की सलाह दी गई है। वहीं, समय पर बोए गए धान में बालियां निकलने की अवस्था को देखते हुए खरपतवार हटाने और बौनी किस्म के धान में 40 किलो तथा संकर किस्म के धान में 45 किलो यूरिया का छिड़काव करने की सलाह है। मौसम में बदलाव से झुलसा रोग बढ़ने की आशंका को देखते हुए भी फसल पर लगातार नजर रखने को कहा गया है।

मक्का-सब्जियों में रोग से बचाव, साफ मौसम में ही करें छिड़काव
मक्का की फसल में भी वर्तमान मौसम के कारण पत्ती झुलसा रोग का प्रकोप बढ़ सकता है। इसके नियंत्रण के लिए एजोक्सीस्ट्रोबिन और मैंकोजेब की 300 ग्राम प्रति एकड़ मात्रा का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। जिन खेतों में मक्के के भुट्टों में दाने बन रहे हैं, वहां पक्षियों से बचाव के लिए खेत में खंभों के सहारे चमकीली फीता बांधने की सलाह दी गई है। सब्जियों में मिर्च और बैंगन की फसल को भी बारिश से नुकसान का खतरा है। इनमें फल सड़न के लक्षण दिखने पर कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 2 ग्राम प्रति लीटर पानी या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 3 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर 15 दिन के अंतराल पर दूसरा और तीसरा छिड़काव किया जा सकता है, लेकिन छिड़काव साफ मौसम में ही करना होगा।
इसे भी पढ़ें : चिकित्सा उपकरणों के नियम बदले, आउटसोर्स स्टरलाइजेशन के लिए अलग लाइसेंस की जरूरत खत्म
टमाटर में पीला मोजेक पर नजर, अरहर-मड़ुआ में पानी नहीं रुकने दें
टमाटर की फसल में पीला मोजेक वायरस का प्रकोप भी देखा जा रहा है। इसकी पहचान पत्तियों के सिकुड़ने और पीला पड़ने से की जा सकती है। यह रोग सफेद मक्खी से फैलता है। किसानों को इसके नियंत्रण के लिए खेत में प्रति एकड़ 3 से 5 चिपचिपे जाल लगाने और संक्रमित पौधों को उखाड़कर नष्ट करने की सलाह दी गई है, ताकि रोग दूसरी फसल में न फैले। बुलेटिन में अरहर की फसल में भी पानी से भरी मिट्टी और लगातार बारिश के कारण तना या जड़ सड़न बढ़ने की आशंका जताई गई है। इसलिए खेत में जलजमाव नहीं होने देने और शुरुआती मुरझाए या प्रभावित पौधों की जड़ों के पास कार्बेन्डाजिम का 1 ग्राम प्रति लीटर पानी का घोल डालने की सलाह है। मड़ुआ में भी जलनिकासी दुरुस्त रखने और जलभराव की स्थिति में तना सड़न से बचाव के लिए पौधों के आसपास कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 0.25 प्रतिशत की दर से प्रयोग करने को कहा गया है।