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Panchayat Darpan

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झारखंड के आदिवासी बहुल 7,107 में से केवल 1,804 गांव में पहुंचा नल से जल, PM मोदी ने हजारीबाग से शुरू किया था अभियान

झारखंड के आदिवासी बहुल गांवों में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान की जमीनी हकीकत बेहद लचर है। राज्य के करीब 75% आदिवासी बहुल गांवों में अब तक नल से शुद्ध पेयजल की सुविधा नहीं पहुंच सकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य के 7,107 आदिवासी बहुल गांवों में महज 1,804 गांवों में ही नल से जल की सुविधा उपलब्ध हो पायी है। यानी निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले काम की रफ्तार काफी धीमी है। जिन जिलों में आदिवासी बहुल गांवों की संख्या अधिक है, वहां स्थिति और भी चिंताजनक है।

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राजधानी रांची में भी सिर्फ 13% गांवों तक पहुंची सुविधा

राजधानी रांची की स्थिति भी बेहतर नहीं है। जिले के 545 आदिवासी बहुल गांवों में केवल 71 गांवों तक ही नल से शुद्ध पेयजल की सुविधा पहुंच पायी है। यह कुल गांवों का करीब 13% है। गुमला में 616 में 197, सिमडेगा में 292 में 216, पूर्वी सिंहभूम में 685 में 19, पश्चिमी सिंहभूम में 925 में 337 और सरायकेला में 489 में 188 गांवों में सुविधा पहुंची है। लोहरदगा के 205 में 69, लातेहार के 267 में 140, पलामू के 90 में 36, बोकारो के 264 में 20, हजारीबाग के 76 में 14 और गिरिडीह के 142 में 71 गांवों को नल से जल मिल रहा है। चतरा के 240 में 10, रामगढ़ के 403 में 124, खूंटी के 398 में 19, रांची के 545 में 71, दुमका के 282 में 44, जामताड़ा के 136 में 113 और देवघर के 403 में 124 गांवों में सुविधा पहुंची है।

पाकुड़-साहिबगंज में हाल बेहाल, कई जिलों में 1% से भी कम

पाकुड़ और साहिबगंज में योजना की रफ्तार सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है। पाकुड़ के 235 आदिवासी बहुल गांवों में सिर्फ तीन गांवों में नल से जल पहुंचा है, जबकि साहिबगंज के 18 गांवों में महज चार गांवों को यह सुविधा मिली है। कोडरमा के 399 गांवों में सिर्फ दो और अन्य कई जिलों में भी काम बेहद सीमित है। आंकड़े बताते हैं कि जिन क्षेत्रों में आदिवासी आबादी अधिक है, वहीं बुनियादी पेयजल सुविधा पहुंचाने की गति सबसे धीमी है। इससे ग्रामीणों को आज भी सुरक्षित पेयजल के लिए पुराने जलस्रोतों और अन्य साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

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पीएम ने हजारीबाग से शुरू किया था अभियान

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान की शुरुआत 2 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड के हजारीबाग से की थी। इसका उद्देश्य आदिवासी बहुल गांवों में बुनियादी सुविधाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और आजीविका से जुड़ी कमियों को दूर करना है। अभियान के तहत देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 549 जिलों के करीब 63,843 गांवों को शामिल किया गया है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक पांच वर्षों में कुल 79,156 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान है। अभियान में 17 संबंधित मंत्रालयों द्वारा लागू की जाने वाली 25 पहल शामिल हैं। इसके बावजूद झारखंड के आदिवासी बहुल गांवों में नल से जल पहुंचाने की मौजूदा स्थिति योजना के क्रियान्वयन की धीमी रफ्तार पर सवाल खड़े करती है।