भारतीय कृषि क्षेत्र ने एक नया वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया है। भारत, पड़ोसी देश चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन गया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा करते हुए बताया कि भारत ने 150.18 मिलियन टन (लगभग 15.02 करोड़ टन) चावल का रिकॉर्ड उत्पादन हासिल किया है, जो चीन के 145.28 मिलियन टन के कुल उत्पादन से काफी अधिक है ।
वैश्विक खाद्य आपूर्ति और निर्यात में भारत का वर्चस्व
इस अभूतपूर्व वृद्धि के साथ ही वैश्विक चावल उत्पादन में भारत का योगदान बढ़कर 28% से अधिक हो गया है। उत्पादन में बढ़त के साथ-साथ भारत अंतरराष्ट्रीय चावल व्यापार में भी शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। भारत विश्व के कुल चावल निर्यात का लगभग 40% हिस्सा (2024-25 में 20.1 मिलियन मीट्रिक टन) अकेले आपूर्ति करता है। भारतीय चावल के प्रमुख खरीदार देशों में सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बेनिन जैसे देश शामिल हैं ।
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प्रमुख उत्पादक राज्य और उत्पादकता
देश के भीतर चावल उत्पादन में योगदान देने वाले प्रमुख राज्यों में उत्तर प्रदेश (13.8%), तेलंगाना (11.6%), पश्चिम बंगाल (10.6%), और पंजाब (9.5%) शीर्ष पर हैं। प्रति हेक्टेयर सबसे अधिक पैदावार के मामले में पंजाब प्रथम स्थान पर है, जहाँ शत-प्रतिशत सिंचाई सुविधाओं और आधुनिक यंत्रीकरण के चलते उच्च उत्पादकता दर्ज की गई है ।
कृषि अनुसंधान और वैज्ञानिकों की भूमिका
इस सफलता के पीछे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और वैज्ञानिकों के सतत शोध का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कृषि मंत्री ने ICAR द्वारा विकसित 184 नई उच्च उपज वाली और जलवायु-अनुकूल (Climate-Resilient) बीज किस्मों को जारी किया। इनमें पूसा DST राइस-1 और कमला जैसी किस्में शामिल हैं, जो कम पानी और विपरीत मौसम में भी बेहतर पैदावार देने में सक्षम हैं ।
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शीर्ष उत्पादक राज्य
उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, पंजाब

प्रमुख निर्यात बाजार
सऊदी अरब, ईरान, इराक, यूएई, बेनिन
सतत खेती और आगे की राह
चावल उत्पादन में आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व हासिल करने के साथ ही सरकार अब प्रत्यक्ष बीजारोपण (Direct Seeded Rice – DSR) जैसी पानी बचाने वाली आधुनिक तकनीकों और पीएम धन-धान्य कृषि योजना के जरिए कम उत्पादकता वाले जिलों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
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