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भारत में किसानों की पहली पसंद क्यों बन ही है मशरूम की खेती, उत्पादन बढ़कर हुआ 177.85 हजार एमटी

भारत में मशरूम की खेती तेजी से एक लाभदायक कृषि-व्यवसाय (Agri-business) के रूप में उभर रही है । कम लागत, सीमित भूमि की आवश्यकता और छोटे फसल चक्र के कारण यह छोटे किसानों, मजदूरों और ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का एक मजबूत जरिया बन रही है । यही कारण है कि आज मशरूम की खेती किसानों की पहली पसंद बन रही है।

उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि

भारत में मशरूम का कुल उत्पादन वित्त वर्ष 2020-21 (FY21) के 177.85 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में 319.03 हजार मीट्रिक टन हो गया है।
इस अवधि में उत्पादन में 79.4% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

विकास को बढ़ावा देने वाले मुख्य कारण

कम संसाधन और जगह: यह फसल महीनों के बजाय कुछ हफ्तों में तैयार हो जाती है और इसके लिए बहुत कम जमीन की जरूरत होती है ।

कृषि अपशिष्ट का पुनर्चक्रण: यह धान के पुआल और लकड़ी के बुरादे जैसे कृषि अवशेषों को प्रोटीन युक्त पौष्टिक भोजन में बदल देती है ।

मांग और लागत: कम शुरुआती लागत, सरकारी सब्सिडी और पौष्टिक शाकाहारी भोजन के प्रति उपभोक्ताओं के बढ़ते रुझान ने इसे लोकप्रिय बनाया है ।

 

प्रमुख सरकारी योजनाएं और नीतियां

एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH): मशरूम खेती के बुनियादी ढांचे, बीज (स्पॉन) और कंपोस्ट इकाइयों के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता दी जाती है। निजी इकाइयों को 40% और कम लागत वाली इकाइयों को 50% तक सब्सिडी मिलती है ।

ATMA (कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी): इसके तहत गठित महिला खाद्य सुरक्षा समूहों को प्रशिक्षण, साहित्य और इनपुट के लिए प्रति समूह ₹25,000 की सहायता राशि प्रदान की जाती है ।

राज्य स्तरीय पहल: उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और ओडिशा के ‘मशरूम और पुष्प कृषि मिशन’ के तहत स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को प्रोत्साहित किया जा रहा है ।

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महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता

ICAR का 2S2M मॉडल: ‘सस्टेनेबल शी-प्रेन्योरशिप इन मशरूम कल्टीवेशन मॉडल’ (2S2M) ने ग्रामीण महिलाओं की आय को ₹1 लाख से अधिक बढ़ाने, निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने और शारीरिक श्रम को 37% तक कम करने में मदद की है ।

बायोटेक-किसान (Biotech-KISAN): इस पहल के तहत 5,000 से अधिक महिलाओं को मशरूम खेती में प्रशिक्षित किया गया है और 1,200 स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाया गया है ।

अवसर और चुनौतियां

मूल्य संवर्धन और निर्यात: ताजे मशरूम की शेल्फ लाइफ 7 से 10 दिन होती है, जिससे सूखे, डिब्बाबंद (canned) और प्रोसेस्ड उत्पादों तथा निर्यात बाजार में नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

सुधार की आवश्यकता: कटाई के बाद का प्रबंधन (Post-harvest management), कोल्ड चेन और प्रोसेसिंग सुविधाओं का विस्तार अभी भी प्रमुख चुनौतियां हैं ।

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