मछली पालन में बीमारी, प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से होने वाले नुकसान से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए झारखंड सरकार ने बीमा जागरूकता अभियान शुरू किया है। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की ओर से धुर्वा स्थित मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र, शालीमार में प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) के तहत दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें अलग-अलग जिलों से आए मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के सदस्य और विभागीय योजनाओं से जुड़े लाभुक शामिल हुए।
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NFDP पोर्टल पर पंजीकरण कराने की अपील
कार्यक्रम में कृषि विभाग के संयुक्त सचिव मनोज कुमार ने कहा कि जलीय कृषि में संभावित नुकसान से बचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से बीमा योजना लागू की गई है। उन्होंने इसे मत्स्य पालकों के लिए आर्थिक सुरक्षा का जरिया बताया। मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार ने किसानों से अधिक से अधिक संख्या में NFDP पोर्टल पर पंजीकरण कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास है कि कोई भी पात्र मत्स्य पालक योजना के लाभ से वंचित न रहे।
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विशेषज्ञों ने समझाई बीमा की पूरी प्रक्रिया
दो दिवसीय सत्र में विशेषज्ञों ने किसानों को जलीय कृषि बीमा से जुड़ी प्रक्रिया और इसके लाभों की जानकारी दी। किसानों को बताया गया कि बीमा योजना से जुड़कर मछली पालन में होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान का जोखिम कम किया जा सकता है। कार्यक्रम में किसानों ने बीमा से संबंधित अपनी शंकाएं और सवाल भी रखे, जिनका विशेषज्ञों ने जवाब दिया। ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में परिवार मत्स्य पालन से जुड़े हैं, ऐसे में बीमा की जानकारी सीधे लाभुकों तक पहुंचाना इस पहल का अहम हिस्सा रहा।
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पात्र किसानों तक लाभ पहुंचाने पर जोर
विभाग ने स्पष्ट किया कि योजना का उद्देश्य केवल बीमा पॉलिसी तक किसानों की पहुंच बनाना नहीं, बल्कि पात्र मत्स्य पालकों को इसकी प्रक्रिया समझाकर उन्हें आर्थिक रूप से सुरक्षित करना भी है। इसके लिए निदेशालय स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी किसान की आय का बड़ा हिस्सा तालाब में पाले गए मछलियों पर निर्भर है, तो किसी नुकसान की स्थिति में बीमा उसके परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करने में मदद कर सकता है। यही वजह है कि किसानों को पंजीकरण और योजना की शर्तों की सही जानकारी देने पर जोर दिया जा रहा है।
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विभाग और विशेषज्ञों ने किसानों की शंकाएं दूर कीं
कार्यक्रम में उप सचिव राजीव रंजन तिवारी, संयुक्त मत्स्य निदेशक संजय गुप्ता, उप निदेशक शंभु प्रसाद यादव, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी की क्षेत्रीय प्रबंधक आशा प्रसाद और उप प्रबंधक मनीषा टोप्पो समेत विभागीय अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे। सत्र के दौरान किसानों को बीमा योजना से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी दी गई। विभाग का कहना है कि जागरूकता और पंजीकरण बढ़ने से अधिक संख्या में मत्स्य पालक योजना के दायरे में आ सकेंगे और मछली पालन को होने वाले संभावित नुकसान से आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।
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