नई दिल्ली: देश में त्योहारों के सीजन से ठीक पहले चीनी की आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक सख्त कदम उठाया है. केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने बड़े चीनी डीलरों और थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी स्टॉक रखने की सीमा को तत्काल प्रभाव से आधा कर दिया है.
अब कोई भी ऐसा थोक खरीदार या औद्योगिक उपभोक्ता जो प्रति माह 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग करता है, वह 15 दिनों से अधिक की इन्वेंट्री (स्टॉक) नहीं रख सकेगा. इससे पहले जुलाई में सरकार ने यह सीमा 30 दिनों की तय की थी. सरकार का यह नया नियम 1 सितंबर 2026 से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा.
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इन औद्योगिक इकाइयों पर पड़ेगा सीधा असर
सरकार के इस कड़े फैसले के दायरे में सभी बड़े औद्योगिक खरीदार आएंगे, जिनमें मिठाई निर्माता, कोल्ड ड्रिंक व सॉफ्ट ड्रिंक कंपनियां, कन्फेक्शनरी, बिस्कुट निर्माता और बड़ी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां शामिल हैं. भारत में कुल चीनी खपत का लगभग 65% हिस्सा इन्हीं थोक खरीदारों के पास जाता है. हालांकि, केंद्र या राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों और स्थानीय निकायों के संस्थानों को इस सीमा से छूट दी गई है.
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कीमतों में रिकॉर्ड उछाल बनी मुख्य वजह
अगस्त 2026 में चीनी की थोक कीमतों में अचानक 10% से अधिक की तेजी देखी गई है. देश के प्रमुख थोक बाजारों जैसे कानपुर और कोलकाता में चीनी के दाम 6,000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को भी पार कर गए हैं, जबकि औसत थोक भाव 5,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर बना हुआ है. खुदरा बाजार में चीनी की औसत कीमत 52 से 62 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 13% से 20% तक महंगी है. मिलों में एक्स-मिल चीनी के दाम 5,400 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं, जो पिछले साल इसी अवधि में 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थे.
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आपूर्ति संकट से निबटने कोशिश
चीनी की कीमतों में इस भारी उछाल के पीछे मानसून की बेरुखी (विशेषकर महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे मुख्य उत्पादक राज्यों में कम बारिश) को बताया जा रहा है. इसके अलावा, देश में चीनी का बफर स्टॉक भी साल 2010 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच कर करीब 32 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि सामान्य तौर पर 60 लाख टन के स्टॉक की आवश्यकता होती है. इस आपूर्ति संकट के बीच बाजार में जमाखोरी और कृत्रिम कमी को रोकने के लिए सरकार ने मिलों को आदेश दिया है कि वे बिक्री के 7 दिनों के भीतर चीनी की डिलीवरी सुनिश्चित करें. साथ ही, सरकार 10 लाख टन कच्चे चीनी के शून्य-शुल्क आयात की योजना पर भी विचार कर रही है और मिलों को पेराई सत्र सामान्य से 10-15 दिन पहले शुरू करने की सलाह दी गई है.
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