रांची: रामगढ़ स्थित सुप्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिका ऐतिहासिक रजरप्पा मंदिर के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण को लेकर दायर अवमानना याचिका पर मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर अदालत ने गहरी नाराजगी जताई। पूर्व के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पर्यटन विभाग के सचिव के अदालत में पेश न होने पर कड़ा संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने पर्यटन सचिव और रामगढ़ के उपायुक्त (DC) को अगली सुनवाई यानी 5 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से (सशरीर) कोर्ट में हाजिर होने का आदेश जारी किया है।
सुनवाई के मुख्य बिंदु
आदेश का अनुपालन न होने पर नाराजगी: अदालत ने कहा कि मंदिर परिसर में बुनियादी सुविधाओं के विकास और सुरक्षा प्रबंधों को लेकर पूर्व में दिए गए आदेशों का समय पर अनुपालन नहीं किया गया है।
फंडिंग पर रुख बदलने पर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से फंड व्यवस्था और योजनाओं (जैसे DMFT व केंद्र की PRASAD योजना) को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने पर अदालत ने सवाल उठाए और 5 अक्टूबर को पूरी रूपरेखा पेश करने को कहा।
अधिकारियों को अंतिम चेतावनी
पर्यटन सचिव की अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली तारीख पर पर्यटन विभाग के सचिव और रामगढ़ डीसी दोनों उपस्थित रहकर वास्तविक प्रगति और कार्ययोजना का ब्योरा दें। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब प्रशासनिक महकमे में रजरप्पा मंदिर विकास योजना को लेकर हलचल तेज हो गई है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।