राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अब करीब छह माह का समय बचा है, लेकिन पंचायतों के जरिए गांवों में विकास कार्यों के लिए आवंटित 658 करोड़ रुपए गाइडलाइन के अभाव में अटके हुए हैं। पांचवें राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर पहली बार पंचायतों के लिए इतनी बड़ी राशि आवंटित की गई है। राज्य में 4,423 पंचायतें हैं, जिनसे करीब 2.50 करोड़ ग्रामीण आबादी जुड़ी है। इनमें सड़क, नाली, जलापूर्ति और दूसरी स्थानीय जरूरतों से जुड़े काम पंचायत स्तर पर किए जाने हैं। राज्य की करीब 76 प्रतिशत आबादी पंचायतों के माध्यम से होने वाले विकास कार्यों पर निर्भर है। ऐसे में राशि उपलब्ध होने के बावजूद उसका इस्तेमाल नहीं हो पाना पंचायतों के विकास को प्रभावित कर रहा है। पंचायत चुनाव नजदीक होने के कारण बचे समय में राशि का उपयोग नहीं होने पर कई जरूरी काम अगले चरण में चले जाएंगे।
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10:15:75 के अनुपात में बंटनी है राशि
पांचवें राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर आवंटित 658 करोड़ रुपए को जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत के बीच 10:15:75 के अनुपात में बांटा गया है। इसके तहत जिला परिषद के हिस्से में 65.80 करोड़, पंचायत समिति को 98.70 करोड़ और ग्राम पंचायतों को करीब 493.51 करोड़ रुपए मिलेंगे। ग्राम पंचायतों के हिस्से की राशि से ग्रामीण स्तर पर सड़क, नाली, पेयजल समेत स्थानीय जरूरतों से जुड़े छोटे-छोटे विकास कार्य सीधे कराए जा सकते हैं। वर्ष 2010 के बाद करीब 16 वर्ष में यह पहला मौका है, जब राज्य वित्त आयोग के माध्यम से पंचायतों को इस तरह राशि उपलब्ध कराई गई है। हालांकि राशि खर्च करने के लिए आवश्यक गाइडलाइन जारी नहीं होने से पंचायतें इसका उपयोग नहीं कर पा रही हैं। इससे पंचायतों में विकास से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं और जनप्रतिनिधियों में भी असमंजस की स्थिति है।
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कहीं लौट न जाए डेवलपमेंट का पैसा
राज्य वित्त आयोग की राशि को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि आवंटन के बाद भी स्पष्ट गाइडलाइन नहीं मिलने से पंचायतों के लिए राशि का कोई मतलब नहीं रह जाता। खर्च की अनुमति और प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने के कारण कई पंचायतें विकास कार्य शुरू नहीं कर पा रही हैं। पंचायत जनप्रतिनिधि संघ के अध्यक्ष विकास कुमार महतो का कहना है कि अगर राशि खर्च करने की गाइडलाइन जारी नहीं की गई तो छह माह में भी पंचायतों को पीछे धकेलने वाली स्थिति बनी रहेगी। राज्य सरकार की ओर से 29 मई 2026 को वित्त विभाग से संबंधित पत्र जारी किया गया था। इसमें 658 करोड़ रुपए आवंटित करने की बात कही गई, लेकिन अब तक राशि खर्च करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। राशि पंचायतों को दी जानी है ताकि जरूरी विकास कार्य कराए जा सकें। चुनाव से पहले समय पर गाइडलाइन जारी नहीं हुई तो आवंटित राशि का अपेक्षित उपयोग नहीं हो पाएगा।