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Panchayat Darpan

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NFHS 6 Report : झारखंड में संस्थागत प्रसव 1.6% बढ़ा, लेकिन साहिबगंज-पाकुड़ में 10% से ज्यादा की गिरावट

झारखंड में संस्थागत प्रसव को लेकर तस्वीर में मामूली सुधार हुआ है, लेकिन संताल परगना के छह जिलों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-6 के 2023-24 के आंकड़ों की तुलना एनएफएचएस-5 के 2019-21 के आंकड़ों से करने पर सामने आया कि संताल परगना के चार जिलों साहिबगंज, पाकुड़, गोड्डा और जामताड़ा में स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने की दर घटी है। वहीं देवघर और दुमका में संस्थागत प्रसव बढ़ा है। सबसे बड़ी गिरावट साहिबगंज में दर्ज की गई। यहां 2019-21 में 75.7% प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में हुए थे, जो 2023-24 में घटकर 63.9% रह गए। यानी पांच साल के अंतराल में 11.8 प्रतिशत अंक की कमी आई। पाकुड़ में भी संस्थागत प्रसव की दर 74.2% से घटकर 63.8% हो गई। यहां 10.4 प्रतिशत अंक की गिरावट दर्ज की गई है।

पाकुड़-साहिबगंज राज्य औसत से करीब 13.5 अंक पीछे

संताल के अन्य जिलों में भी संस्थागत प्रसव की स्थिति कमजोर हुई है। गोड्डा में यह दर 83.3% से घटकर 74.7% रह गई। यानी 8.6 प्रतिशत अंक की गिरावट हुई। जामताड़ा में संस्थागत प्रसव 82.5% से घटकर 74.7% रह गया। यहां 7.8 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई है। खास बात यह है कि पूरे झारखंड में संस्थागत प्रसव की दर इस अवधि में 75.8% से बढ़कर 77.4% हुई है। यानी राज्य स्तर पर 1.6 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव की दर 75% और शहरी क्षेत्रों में 91.7% है। इसके मुकाबले पाकुड़ में 63.8% और साहिबगंज में 63.9% प्रसव ही स्वास्थ्य संस्थानों में हो रहे हैं। दोनों जिले राज्य के औसत से करीब 13.5 प्रतिशत अंक पीछे हैं।

 

देवघर-दुमका में बढ़ा संस्थागत प्रसव

संताल परगना के छह जिलों में देवघर और दुमका ने बेहतर तस्वीर पेश की है। देवघर में संस्थागत प्रसव की दर 2019-21 के 72.3% से बढ़कर 2023-24 में 76.1% हो गई। यहां 3.8 प्रतिशत अंक का सुधार दर्ज किया गया। इसी तरह दुमका में संस्थागत प्रसव 69% से बढ़कर 72.5% हो गया। यानी 3.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई। इन दोनों जिलों के आंकड़े बताते हैं कि स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने को लेकर महिलाओं और परिवारों का भरोसा बढ़ा है। हालांकि, संताल के ही दूसरे जिलों में इसके उलट तस्वीर सामने आई है। ऐसे में सिर्फ राज्य स्तर पर सुधार को पर्याप्त नहीं माना जा सकता। जिलावार अंतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और उपयोग में मौजूद असमानता को भी सामने ला रहा है।

स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच और प्रसव पूर्व देखभाल में कहां कमी?

एनएफएचएस के आंकड़ों से यह सवाल भी उठ रहा है कि साहिबगंज और पाकुड़ जैसे जिलों में संस्थागत प्रसव की दर लगातार क्यों घटी है। गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंच, प्रसव पूर्व देखभाल, समय पर रेफरल और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा जैसे पहलुओं पर जमीनी स्तर पर ध्यान देने की जरूरत दिख रही है। खासकर तब, जब राज्य का औसत संस्थागत प्रसव 77.4% तक पहुंच गया है, लेकिन साहिबगंज और पाकुड़ 64% के आसपास ही हैं। संताल परगना के छह जिलों में दो में सुधार और चार में गिरावट का यह अंतर स्वास्थ्य व्यवस्था की जिलावार स्थिति की पड़ताल की जरूरत बताता है। आंकड़े यह भी संकेत देते हैं कि संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए सिर्फ स्वास्थ्य केंद्रों की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं को समय पर वहां तक पहुंचाने और परिवारों में संस्थागत प्रसव के प्रति भरोसा मजबूत करने पर भी विशेष जोर देना होगा।